Puravankara के शेयरों में आज गजब की तेजी देखी गई, करीब **15%** का उछाल आया। कंपनी ने Q1 FY27 के लिए **₹1,439 करोड़** की प्री-सेल्स दर्ज की है, जो पिछले साल की तुलना में **28%** ज़्यादा है। साथ ही, कंपनी ने अपनी कमर्शियल प्रॉपर्टी Purva Zentech को **₹625.94 करोड़** में बेचा और **₹5,200 करोड़** के नए प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में जोड़े हैं।
Puravankara के नतीजों में दमदार उछाल
Puravankara Limited के शेयरों ने सोमवार को बाजार में शानदार प्रदर्शन किया, लगभग 15% की बढ़त के साथ ₹256.66 पर बंद हुए। यह तेजी कंपनी के 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के मजबूत ऑपरेशनल अपडेट के बाद आई है। कंपनी ने इस तिमाही में ₹1,439 करोड़ की प्री-सेल्स वैल्यू दर्ज की, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 28% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। इस ग्रोथ में कलेक्शंस में 40% का उछाल, जो ₹1,199 करोड़ तक पहुँच गया, और सेल्स वॉल्यूम में 9% की बढ़ोतरी, जो 1.36 मिलियन वर्ग फुट रही, का बड़ा योगदान रहा।
कीमत में मजबूती और प्रॉपर्टी की बिक्री
इस शानदार प्रदर्शन का एक मुख्य कारण एवरेज प्राइस रियलाइजेशन (Average Price Realization) में 18% का सुधार रहा, जो ₹10,589 प्रति वर्ग फुट तक पहुँच गया। यह दिखाता है कि कंपनी के ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट सेगमेंट पर फोकस खरीदारों को काफी पसंद आ रहा है। रेजिडेंशियल सेल्स के अलावा, डेवलपर ने अपनी कमर्शियल प्रॉपर्टी Purva Zentech को ICICI Prudential AMC को ₹625.94 करोड़ के एंटरप्राइज वैल्यू (Enterprise Value) पर बेच दिया है। इस डील, जिसमें स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के शेयरों की बिक्री और बैलेंस शीट एडजस्टमेंट्स शामिल हैं, से कंपनी की कैश पोजीशन और मजबूत हुई है।
नए प्रोजेक्ट्स और भविष्य की रणनीति
कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि इस तिमाही में चार नई ज़मीनें भी पोर्टफोलियो में जोड़ी गई हैं, जिनकी कुल संभावित प्रोजेक्ट वैल्यू (Gross Development Value) ₹5,200 करोड़ है। ये अधिग्रहण कंपनी की दक्षिणी और पश्चिमी भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। कंपनी ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹11,200 करोड़ की सालाना सेल्स गाइडेंस को बनाए रखा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों के लिए, हालिया प्रदर्शन कंपनी की सेल्स मोमेंटम को बनाए रखने और कीमतों में सुधार करने की क्षमता को दर्शाता है। हालांकि, रियल एस्टेट सेक्टर अभी भी इंटरेस्ट रेट साइकल्स (Interest Rate Cycles) और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन (Project Execution Timelines) के प्रति संवेदनशील है। संपत्ति की बिक्री से लिक्विडिटी (Liquidity) में सुधार हुआ है, लेकिन आने वाली तिमाहियों में नए प्रोजेक्ट लॉन्च की रफ्तार और कंपनी कितनी जल्दी अपनी नई ज़मीन अधिग्रहण को एक्टिव सेल्स में बदल पाती है, इस पर नज़र रखनी होगी। निवेशकों को यह भी देखना होगा कि क्या वर्तमान प्राइस रियलाइजेशन का ट्रेंड जारी रहता है, क्योंकि नए क्षेत्रों में विस्तार के साथ कंपनी की निरंतर ग्रोथ इन प्रतिस्पर्धी बाजारों में डिमांड की स्थिरता पर निर्भर करेगी।
