Prestige Group का कमाल: ₹70,000 करोड़ के पार पहुंचा मार्केट कैप!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Prestige Group का कमाल: ₹70,000 करोड़ के पार पहुंचा मार्केट कैप!

बेंगलुरु की रियल एस्टेट कंपनी Prestige Group ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) अब लगभग ₹70,000 करोड़ तक पहुंच गया है। 1956 में एक छोटी सी टेलरिंग शॉप से शुरू होकर, यह कंपनी आज देश भर में रियल एस्टेट की दुनिया का एक जाना-माना नाम बन गई है।

₹70,000 करोड़ का सफर: 1956 से आज तक

Prestige Group का मार्केट कैप लगभग ₹70,000 करोड़ तक पहुंचना, इसके सफर की एक बड़ी कहानी कहता है। 1986 में कंपनी की औपचारिक शुरुआत हुई थी, लेकिन इसकी जड़ें 1956 में बेंगलुरु में खुली एक छोटी सी सिलाई की दुकान में हैं। इरफान रज़्ज़क और उनके परिवार के नेतृत्व में, इस कंपनी ने ₹40,000 की मामूली शुरुआती पूंजी से एक बड़ा रियल एस्टेट डेवलपर बनने तक का सफर तय किया है।

बेंगलुरु के विकास का फायदा और रणनीति में बदलाव

कंपनी की इस ग्रोथ में बेंगलुरु शहर के तेजी से हुए विकास का बड़ा हाथ रहा, जो एक बड़ा टेक्नोलॉजी हब बन गया। Prestige Group ने शुरुआत में ऑफिस स्पेस और रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, और UB City और Forum Mall जैसे प्रोजेक्ट्स से अपनी पहचान बनाई। साल 2010 में ₹1,200 करोड़ जुटाने वाले इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के बाद, कंपनी ने अपनी पहुंच को बेंगलुरु से बाहर निकालकर हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और मुंबई जैसे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में बढ़ाया।

आज, कंपनी हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट में भी सक्रिय है। ऑफिस पार्क, मॉल और होटलों को अपने प्रोजेक्ट्स में शामिल करके, Prestige Group ने कमाई के कई रास्ते खोल दिए हैं। 2020 के आसपास मुंबई जैसे महंगे शहर में कदम रखने के लिए, कंपनी ने री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और जॉइंट वेंचर्स पर जोर दिया, जिससे उन्हें सीधे ज़मीन खरीदने के भारी निवेश से बचने में मदद मिली।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

रियल एस्टेट जैसे कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस में, निवेशक कंपनी के कर्ज (Debt) और कैपिटल खर्च (Capital Spending) पर खास नजर रखते हैं। Prestige Group ने अपने प्रोजेक्ट्स को बढ़ाते हुए अपने बैलेंस शीट को भी संभालने की रणनीति अपनाई है। कंपनी का नेतृत्व अभी भी रज़्ज़क परिवार के हाथ में है, जिसमें दूसरी और तीसरी पीढ़ी के सदस्य महत्वपूर्ण पदों पर हैं।

निवेशकों के लिए आगे चलकर यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपने बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करते हुए कैसे प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखती है। भारत का रियल एस्टेट सेक्टर ब्याज दरों और प्रीमियम हाउसिंग की मांग जैसे फैक्टर से प्रभावित होता है। मुंबई और NCR जैसे शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ, कंपनी की स्पीड, प्रोजेक्ट डिलीवरी टाइमलाइन और कर्ज प्रबंधन पर फोकस बना रहेगा। नए प्रोजेक्ट लॉन्च, कमर्शियल एसेट्स में ऑक्यूपेंसी रेट और विभिन्न जॉइंट वेंचर्स की प्रगति पर निवेशकों की नजरें रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.