Prestige Estates Projects के शेयरों में आज गिरावट देखने को मिली है। महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल (MREAT) ने Mahalaxmi Tower प्रोजेक्ट को कमर्शियल से रेजिडेंशियल में बदलने का आदेश दिया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
कानूनी दांव-पेच और असर
महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल (MREAT) के ताजा आदेश के बाद Prestige Estates Projects लिमिटेड पर दबाव साफ दिख रहा है। ट्रिब्यूनल ने Mahalaxmi Tower को उसके मूल स्वरूप यानी 'रेजिडेंशियल' (आवासीय) प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया है। इससे कंपनी की इस प्रोजेक्ट को कमर्शियल बनाने की योजना पर बड़ा झटका लगा है।
बाजार में हलचल
इस खबर के सामने आते ही स्टॉक अपने इंट्राडे हाई ₹1,646.60 से लगभग 2.93% तक लुढ़क गया। निवेशक इस कानूनी फैसले के बाद कंपनी के भविष्य के मार्जिन और वैल्यूएशन पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला करीब 20 साल पुराने एक विवाद से जुड़ा है। जिन होमबॉयर्स ने प्रोजेक्ट के शुरुआती दिनों में रेजिडेंशियल यूनिट्स बुक की थीं, उन्होंने ट्रिब्यूनल का रुख किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन बायर्स ने प्रोजेक्ट की कुल लागत का लगभग 50% भुगतान पहले ही कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने इन बायर्स के दावों को सही माना और प्रोजेक्ट के रेजिडेंशियल नेचर को बरकरार रखने का फैसला सुनाया।
आगे की राह
कमर्शियल रियल एस्टेट और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के मुनाफे के गणित में जमीन-आसमान का अंतर होता है। इस फैसले से प्रोजेक्ट की रेवेन्यू प्रोजेक्शन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। फिलहाल कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन निवेशकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि कंपनी आगे क्या कदम उठाती है और क्या वे इस आदेश को चुनौती देंगे या प्रोजेक्ट की रूपरेखा बदलेंगे।
