Prestige Estates Projects के पास ₹65,000 करोड़ का ऐसा रेवेन्यू है जिसे अभी तक बुक्स में दर्ज नहीं किया गया है। कंपनी FY26 में ₹30,024 करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री के बाद अब अकाउंटिंग के 'परसेंटेज-ऑफ-कंप्लीशन' मेथड को अपनाने पर विचार कर रही है। इससे आने वाली तिमाहियों में कंपनी की कमाई और रेवेन्यू रिपोर्टिंग में बड़ा बदलाव आ सकता है।
क्या हुआ है?
Prestige Estates Projects Ltd. के पास फिलहाल ₹65,000 करोड़ का ऐसा रेवेन्यू है जिसे अभी तक अनरिकॉग्नाइज्ड (Unrecognized) माना जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी ने प्रॉपर्टी तो बेच दी है, लेकिन उसका पैसा अभी तक प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में इनकम के तौर पर दर्ज नहीं हुआ है। रियल एस्टेट में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डेवलपर अक्सर प्रोजेक्ट पूरा होने और खरीदार को हैंडओवर करने के बाद ही रेवेन्यू दर्ज करते हैं। यह बड़ी रकम तब जमा हुई है जब कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ₹30,024 करोड़ की शानदार बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल से 76% ज्यादा है।
अकाउंटिंग में बदलाव पर चल रही चर्चा
कंपनी के चेयरमैन इरफान रज़्ज़ाक ने बताया है कि मैनेजमेंट इस वक्त ऑडिटर के साथ मिलकर रेवेन्यू दर्ज करने के तरीके को बदलने पर विचार कर रहा है। फिलहाल कंपनी 'कंप्लीशन मेथड' का इस्तेमाल करती है, जिसके तहत प्रोजेक्ट पूरा होने पर ही इनकम दर्ज होती है। अब वे 'परसेंटेज ऑफ कंप्लीशन मेथड' की ओर शिफ्ट होने की सोच रहे हैं। इस नए तरीके से, कंस्ट्रक्शन के काम के साथ-साथ धीरे-धीरे रेवेन्यू दर्ज किया जा सकेगा।
निवेशकों के लिए यह एक अहम बदलाव है। अगर कंपनी यह स्विच करती है, तो भविष्य में रेवेन्यू और प्रॉफिट की रिपोर्टिंग अधिक स्मूथ और स्टेबल हो सकती है। हालांकि, इससे पहले के प्रोजेक्ट्स के अंत में दर्ज होने वाला रेवेन्यू अब पहले ही दर्ज होने लगेगा। ध्यान रहे कि इससे कंपनी को मिलने वाले कैश में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन तिमाही नतीजों में वित्तीय तस्वीर बदल जाएगी।
वित्तीय ग्रोथ और फ्यूचर टारगेट
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में दमदार प्रदर्शन किया है। नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹467.5 करोड़ से बढ़कर ₹1,195.5 करोड़ हो गया है, यानी दोगुने से भी ज्यादा। कंपनी की कुल इनकम भी बढ़कर ₹13,195.5 करोड़ हो गई, जबकि 2024-25 में यह ₹7,735.5 करोड़ थी। इस मोमेंटम को बनाए रखते हुए, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹35,000 से ₹36,000 करोड़ की बिक्री का बड़ा टारगेट रखा है।
जोखिम और किन बातों पर रखें नज़र
बिक्री के आँकड़े भले ही बड़े हों, लेकिन निवेशकों को रियल एस्टेट सेक्टर की असलियतों पर भी गौर करना चाहिए। कंपनी के पास लगभग ₹58,000 करोड़ के नए प्रोजेक्ट लॉन्च होने की पाइपलाइन है। लेकिन, इन प्रोजेक्ट्स का लॉन्च होना रेगुलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करता है। अगर अप्रूवल मिलने में देरी हुई, तो कंपनी अपने आने वाले सेल्स टारगेट को पूरा करने में पिछड़ सकती है।
इसके अलावा, अकाउंटिंग मेथड में संभावित बदलाव से कमाई की रिपोर्टिंग में स्थिरता आ सकती है, लेकिन निवेशकों को असली ग्रोथ को समझने के लिए इस पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। निवेशकों को अकाउंटिंग पॉलिसी में बदलाव की पुष्टि, प्रोजेक्ट लॉन्च की रफ्तार और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बिक्री की रफ्तार बनाए रखने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।
