Phoenix Mills के शेयरों में आज **4%** से ज्यादा की जोरदार तेजी देखी गई। कंपनी ने जून तिमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिसमें रिटेल कंजम्पशन में पिछले साल की तुलना में **32%** का इजाफा हुआ है।
रिटेल कंजम्पशन ने बढ़ाई रफ्तार
Phoenix Mills ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि जून तिमाही के दौरान कुल रिटेल कंजम्पशन ₹4,727 करोड़ रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 32% ज्यादा है। यह ग्रोथ कंपनी के उम्मीदों से बेहतर रही है और प्रीमियम शॉपिंग डेस्टिनेशन की मजबूत मांग को दर्शाती है। कंपनी के ज्यादातर मॉल्स में यह बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो इसके रेवेन्यू का मुख्य जरिया हैं।
हालांकि, कंपनी के मैनेजमेंट की नजरें ज्वेलरी जैसे हाई-वैल्यू गुड्स (High-Value Goods) की बिक्री पर भी है। क्योंकि ज्वेलरी के किराये का हिस्सा उनके सेल्स (Sales) पर निर्भर करता है, इसलिए सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। पर, कंपनी का डाइवर्सिफाइड (Diversified) मॉडल इस पर ज्यादा निर्भरता को कम करता है।
कमाई के दूसरे जरिया
रिटेल के अलावा, Phoenix Mills का कमर्शियल (Commercial) और हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) सेगमेंट भी ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहा है। जून तिमाही में कमर्शियल ऑफिस पोर्टफोलियो में लगभग 1.9 लाख वर्ग फुट की ग्रॉस लीजिंग (Gross Leasing) हुई। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में The St. Regis Mumbai ने 15% और Courtyard by Marriott Agra ने 23% RevPAR (Revenue Per Available Room) ग्रोथ दर्ज की। RevPAR होटल के कमरों से होने वाली कमाई को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
इसके अलावा, कंपनी के रेजिडेंशियल (Residential) सेगमेंट में ₹64 करोड़ की ग्रॉस सेल्स (Gross Sales) और ₹51 करोड़ का कलेक्शन हुआ है। ये सेगमेंट्स रिटेल डिवीजन की तुलना में छोटे होने के बावजूद, बिजनेस को एक स्थिरता प्रदान करते हैं।
मार्केट में क्या है खास?
इस साल Phoenix Mills के शेयर में 12.5% की बढ़त देखी गई है, जबकि Nifty 50 इंडेक्स इसी दौरान 7.9% गिरा है। यह निवेशकों के उस भरोसे को दिखाता है जो वे ऑर्गेनाइज्ड रिटेल (Organized Retail) और कंजम्पशन-आधारित बिजनेस मॉडल पर कर रहे हैं।
आगे चलकर, निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि रिटेल कंजम्पशन की यह ग्रोथ कितनी बनी रहती है और नए मॉल्स का काम कैसे आगे बढ़ता है। इसके साथ ही, नए लीज पर दिए गए कमर्शियल ऑफिस स्पेसेस (Commercial Office Spaces) में ऑक्यूपेंसी (Occupancy) और नए प्रोजेक्ट्स पर कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) के दौरान कंपनी अपने डेट (Debt) को कैसे मैनेज करती है, यह देखना भी अहम होगा।
