Peninsula Land: ₹9,615 लाख के निवेश पर ऑडिटर का 'लाल झंडा', घाटे में फंसी कंपनी
Peninsula Land Limited के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जहाँ एक ओर कंपनी के स्टैंडअलोन (Standalone) प्रदर्शन में बड़ी गिरावट दिखा रहे हैं, वहीं कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर रेवेन्यू में जोरदार उछाल के बावजूद घाटा (Loss) बना हुआ है। लेकिन नतीजों से भी बड़ी चिंता कंपनी के ऑडिटर, S R B C & CO LLP, की रिपोर्ट से निकलकर सामने आई है। ऑडिटर ने कंपनी के ₹9,615 लाख (स्टैंडअलोन) और ₹9,184 लाख (कंसोलिडेटेड) के HIPDPL (Hem Infrastructure and Development Private Limited) में फंसे एक्सपोजर की रिकवरी का ठीक से आकलन (Assess) करने में असमर्थता जताते हुए 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) जारी किया है।
स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड नतीजों का हाल
स्टैंडअलोन प्रदर्शन (Standalone Performance):
कंपनी की स्टैंडअलोन आय (Revenue) इस तिमाही में 72.1% साल-दर-साल (YoY) के हिसाब से गिरकर ₹2,691 लाख पर आ गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹9,665 लाख थी। इसके चलते कंपनी को ₹1,112 लाख का घाटा हुआ, जो पिछले साल के ₹681 लाख के घाटे से कहीं ज़्यादा है।
9 महीने (9M FY26) के लिए स्टैंडअलोन रेवेन्यू 45.3% गिरकर ₹9,665 लाख रहा, जबकि पिछले साल यह ₹17,900 लाख था। इस दौरान घाटा बढ़कर ₹3,510 लाख हो गया, जबकि पिछले साल यह लगभग शून्य (₹3 लाख) था। Q3 FY26 के लिए बेसिक ईपीएस (EPS) स्टैंडअलोन ₹(0.34) और 9M FY26 के लिए ₹(1.06) रहा।
कंसोलिडेटेड प्रदर्शन (Consolidated Performance):
वहीं, कंसोलिडेटेड नतीजों में Q3 FY26 में रेवेन्यू 644.5% उछलकर ₹2,729 लाख पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹366 लाख था। हालांकि, इस बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी घाटे से उबर नहीं पाई। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Net Profit) ₹1,198 लाख के घाटे में रहा, हालांकि यह पिछले साल की ₹1,856 लाख की घाटा से थोड़ा कम है।
9 महीने (9M FY26) के लिए कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 64.4% गिरकर ₹1,523 लाख पर आ गया, जबकि पिछले साल यह ₹4,280 लाख था। इस दौरान घाटा काफी बढ़कर ₹3,543 लाख हो गया, जो पिछले साल ₹790 लाख था। कंसोलिडेटेड ईपीएस (EPS) Q3 FY26 के लिए ₹(0.36) और 9M FY26 के लिए ₹(1.07) रहा।
HIPDPL मामला: इंसॉल्वेंसी और ऑडिटर की चिंता
सबसे बड़ा खतरा HIPDPL से जुड़ा है। यह कंपनी की सब्सिडियरी PHIPL के ज़रिए एक जॉइंट वेंचर (Joint Venture) है और फिलहाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत इंसॉल्वेंसी (Insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रही है। ऑडिटर इस बात का आकलन नहीं कर पा रहे हैं कि कंपनी द्वारा HIPDPL में लगाए गए ₹9,615 लाख (स्टैंडअलोन) और ₹9,184 लाख (कंसोलिडेटेड) के निवेश की कितनी वसूली (Recoverability) हो पाएगी।
Peninsula Land ग्रुप ने NCLT के फैसलों के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील की थी, लेकिन वह खारिज हो गई। अब मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में विचाराधीन है। कंपनी का मैनेजमेंट इस मामले में सेटलमेंट (Settlement) के लिए बातचीत कर रहा है और कानूनी रास्ते भी तलाश रहा है, लेकिन इन पैसों की वापसी का नतीजा अनिश्चित बना हुआ है। ऑडिटर की यह 'क्वालिफाइड ओपिनियन' कंपनी की एसेट वैल्यूएशन (Asset Valuation) और भविष्य की वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
आगे की राह: जोखिम और उम्मीदें
Peninsula Land के लिए सबसे बड़ा जोखिम HIPDPL में फंसे भारी-भरकम निवेश की अनिश्चितता है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का नतीजा कंपनी के लिए बड़े राइट-डाउन (Write-down) का कारण बन सकता है, अगर यह पैसा वापस नहीं मिलता है। निवेशकों को इस कानूनी प्रक्रिया की प्रगति और मैनेजमेंट की सेटलमेंट कराने की क्षमता पर कड़ी नजर रखनी होगी।
इसके अलावा, कंपनी के स्टैंडअलोन नतीजों में लगातार घाटा (Net Loss) दिखना भी एक बड़ी चिंता है। यह दर्शाता है कि कंपनी का मुख्य रियल एस्टेट बिजनेस (Real Estate Business) अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। कंपनी पूरी तरह से रियल एस्टेट डेवलपमेंट के कारोबार में है, इसलिए यह सेक्टर की साइकिल और रेगुलेटरी बदलावों (Regulatory Changes) के प्रति बेहद संवेदनशील है। इस तिमाही में लेबर कोड (Labour Codes) लागू होने के कारण कर्मचारी लाभ पर ₹166 लाख का अतिरिक्त चार्ज भी लगा है।
