Peerless Group का रेवेन्यू ₹1,013 करोड़ पार, FY27 में मुनाफे पर दिख सकता है दबाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
Peerless Group का रेवेन्यू ₹1,013 करोड़ पार, FY27 में मुनाफे पर दिख सकता है दबाव

Peerless Group ने FY26 में ₹1,013 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है, जो FY22 के मुकाबले लगभग दोगुना है। कंपनी का रेवेन्यू हेल्थकेयर और रियल एस्टेट में विस्तार से बढ़ा है, लेकिन FY27 में बढ़ी हुई उधारी लागत और डेप्रिसिएशन के कारण मुनाफे में धीमी गति की उम्मीद है।

Peerless Group का शानदार प्रदर्शन!

Peerless Group ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में ₹1,000 करोड़ का रेवेन्यू पार करने में कामयाबी हासिल की है। यह उपलब्धि इस डाइवर्सिफाइड ग्रुप के लिए ग्रोथ का एक मजबूत संकेत है। ग्रुप का कुल रेवेन्यू ₹1,013 करोड़ रहा, जबकि वित्तीय वर्ष 2022 (FY22) में यह ₹530 करोड़ था। इस साल का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹250 करोड़ दर्ज किया गया है।

हेल्थकेयर सेगमेंट की दमदार ग्रोथ

ग्रुप के हेल्थकेयर डिवीजन ने सबसे बड़ी ग्रोथ दिखाई है। बारसात में नए कैंसर केयर यूनिट की शुरुआत और हॉस्पिटल फैसिलिटी के विस्तार से ग्रुप की कुल बेड क्षमता बढ़कर 1,016 हो गई है। कुछ साल पहले यह क्षमता करीब 400 बेड थी। कोलकाता, गुवाहाटी और बारसात में मौजूद हॉस्पिटल बिजनेस से अकेले अगले वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में ₹500 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी में भी तरक्की

हेल्थकेयर के साथ-साथ, ग्रुप के रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट ने भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। न्यू टाउन में मल्टी-यूज़ प्रोजेक्ट में 71 में से 41 रेजिडेंशियल यूनिट्स बिक चुकी हैं। हॉस्पिटैलिटी बिजनेस का रेवेन्यू पिछले चार सालों में दोगुना से ज्यादा होकर FY22 के ₹39 करोड़ से FY26 में ₹89 करोड़ तक पहुंच गया है।

कैपिटल खर्च और भविष्य की राह

ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर, जयंत रॉय के अनुसार, ग्रुप ने विभिन्न प्रोजेक्ट्स में ₹900 करोड़ का निवेश किया है और जल्द ही ₹400 करोड़ और निवेश करने की योजना है। हालांकि, यह कैपिटल स्पेंडिंग लॉन्ग-टर्म एक्सपेंशन के लिए है, लेकिन इससे कुछ फाइनेंशियल चुनौतियां भी सामने आएंगी। ग्रुप को FY27 में अपने बॉटम लाइन पर दबाव की आशंका है, क्योंकि इंटरेस्ट और डेप्रिसिएशन का खर्च बढ़ेगा। यह खर्च FY25 के ₹55 करोड़ से बढ़कर FY27 में ₹102 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

बढ़ता हुआ फाइनेंसिंग और डेप्रिसिएशन खर्च, ग्रुप के हालिया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भारी उधारी पर निर्भरता को दर्शाता है। निवेशकों के लिए, आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रुप अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखते हुए इन बढ़ती ब्याज देनदारियों को कितनी अच्छी तरह मैनेज करता है। आक्रामक विस्तार और कर्ज की लागत के बीच संतुलन ही कंपनी की नियर-टर्म फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.