Parsvnath Developers के घाटे में भारी बढ़ोतरी, ऑडिटर की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
Parsvnath Developers Limited के ताजा वित्तीय नतीजों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में भारी घाटा दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 376.55% ज्यादा है। कंसोलिडेटेड आधार पर कंपनी का नेट लॉस आफ्टर टैक्स ₹14,948.65 लाख पर पहुंच गया है। वहीं, स्टैंडअलोन आधार पर भी नेट लॉस बढ़कर ₹5,084.95 लाख हो गया है।
📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
कंसोलिडेटेड नतीजे (Q3 FY26):
- कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 4.82% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹6,104.32 लाख रहा। कुल इनकम 13.47% बढ़कर ₹6,796.10 लाख रही।
- हालांकि, नेट लॉस आफ्टर टैक्स में 376.55% की जोरदार उछाल के साथ यह ₹14,948.65 लाख दर्ज किया गया। प्रति शेयर आय (EPS) ₹(3.29) रही।
- पहले नौ महीनों (9M FY26) में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 7.78% घटकर ₹17,827.14 लाख रहा, और नेट लॉस 39.19% बढ़कर ₹36,252.36 लाख (EPS ₹(8.18)) हो गया।
स्टैंडअलोन नतीजे (Q3 FY26):
- स्टैंडअलोन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 24.00% बढ़कर ₹1,918.95 लाख रहा, और कुल इनकम 19.80% बढ़कर ₹2,021.74 लाख रही।
- इसके बावजूद, नेट लॉस आफ्टर टैक्स 67.61% बढ़कर ₹5,084.95 लाख हो गया (EPS ₹(1.17))।
- पहले नौ महीनों (9M FY26) में, स्टैंडअलोन रेवेन्यू 25.09% गिरकर ₹5,085.60 लाख रहा, और नेट लॉस 49.43% बढ़कर ₹10,137.83 लाख (EPS ₹(2.33)) हो गया।
🚨 ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' चेतावनी: कंपनी पर मंडरा रहा खतरा
इस नतीजों की सबसे चिंताजनक बात कंपनी के स्टैचुटरी ऑडिटर, टी आर चड्ढा एंड कंपनी एलएलपी (T R Chadha & Co LLP) की रिपोर्ट है। ऑडिटर ने स्पष्ट रूप से 'गोइंग कंसर्न' (कंपनी के भविष्य में चलते रहने की क्षमता) पर 'मटेरियल अनिश्चितता' का जिक्र किया है। इसका मतलब है कि ऑडिटर को कंपनी के अगले 12 महीनों तक काम जारी रखने की क्षमता पर संदेह है।
इस गंभीर चेतावनी के पीछे कई कारण बताए गए हैं:
- लगातार कैश लॉस: कंपनी लगातार कैश लॉस झेल रही है।
- लिक्विडिटी की तंगी: नकदी की भारी कमी है।
- भुगतान में चूक: कंपनी लेनदारों, वैधानिक निकायों और कर्मचारियों को भुगतान करने में चूक कर रही है।
ऑडिटर ने यह भी बताया है कि उन्हें कुछ महत्वपूर्ण राशियों के संबंध में पर्याप्त ऑडिट एविडेंस (सबूत) नहीं मिले हैं, विशेष रूप से एसेट इम्पेयरमेंट (संपत्ति के मूल्य में कमी) के मामलों में।
ऑडिट में उठे अन्य सवाल:
- DMRC प्रोजेक्ट इम्पेयरमेंट: ऑडिटर DMRC प्रोजेक्ट्स से संबंधित इनटैंगिबल एसेट्स और अनअमोटाइज्ड फीस के इम्पेयरमेंट का सही आकलन नहीं कर पाए, जिसका अनुमान ₹8162.47 लाख से ₹14258.15 लाख के बीच है। इसका कारण कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति और जारी मध्यस्थता कार्यवाही (arbitration proceedings) बताई गई है।
- सब्सिडियरी डिस्प्यूट्स: सब्सिडियरी कंपनियों से जुड़े लोन और निवेश के मूल्य को लेकर अनिश्चितता है, जो जमीन विकास विवादों में फंसी हैं।
- वेन्डर एडवांसेज़ और ट्रेड रिसीवेबल्स: बड़ी मात्रा में वेन्डर एडवांसेज़ और ट्रेड रिसीवेबल्स की रिकवरी पर सवालिया निशान है, जिसके लिए कोई प्रोविजन नहीं किया गया है।
- एक्सेप्शनल गेन पर सवाल: स्टैंडअलोन आधार पर चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन से ₹6,883.56 लाख का एक एक्सेप्शनल गेन दिखाया गया है, लेकिन ऑडिटर को इसके सपोर्टिंग दस्तावेज नहीं दिए गए।
नियामकीय चुनौतियां:
इसके अलावा, कंपनी GST रजिस्ट्रेशन के निलंबन जैसी नियामकीय समस्याओं का भी सामना कर रही है।
जोखिम और भविष्य:
Parsvnath Developers इस वक्त गंभीर वित्तीय दबाव और कई कानूनी विवादों के बोझ तले दबी हुई है। ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' की चेतावनी कंपनी के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है। निवेशकों को संपत्ति के मूल्यांकन और कंपनी की परिचालन निरंतरता से जुड़ी अत्यधिक अनिश्चितताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। जब तक कि कंपनी को बड़ी वित्तीय सहायता न मिले या उसके कानूनी मामलों का कोई सफल समाधान न हो, तब तक भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।