Jaypee Infratech: प्रोजेक्ट्स में देरी और फंड डायवर्जन का आरोप, Suraksha Group की बढ़ीं मुश्किलें

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Jaypee Infratech: प्रोजेक्ट्स में देरी और फंड डायवर्जन का आरोप, Suraksha Group की बढ़ीं मुश्किलें

NCLT द्वारा नियुक्त कमेटी ने Jaypee Infratech के प्रोजेक्ट्स में भारी देरी और वित्तीय कुप्रबंधन का खुलासा किया है। Suraksha Group पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद सितंबर 2028 की डेडलाइन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी ने Jaypee Infratech के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में भारी खामियां पाई हैं, जो अब Suraksha Group के नियंत्रण में हैं। दो सदस्यीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निर्माण कार्य तय रिजोल्यूशन प्लान के लक्ष्यों से काफी पीछे चल रहा है। यह खबर उन हजारों होमबायर्स के लिए बड़ा झटका है जो सालों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं।

वादे और हकीकत में अंतर

Suraksha Group ने जून 2024 में कंपनी की कमान संभाली थी और सभी प्रोजेक्ट्स को सितंबर 2028 तक पूरा करने का वादा किया था। इसके लिए ₹3,000 करोड़ के निवेश का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब रिपोर्ट में वादों और जमीनी हकीकत के बीच चौड़ी खाई नजर आ रही है।

रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए?

  • लेबर की कमी: कंपनी ने 12,000 मजदूरों को तैनात करने का वादा किया था, लेकिन साइट पर इनकी संख्या लगातार काफी कम पाई गई।
  • फंड का हेरफेर: जांच में यह भी सामने आया है कि निर्माण के लिए तय फंड को कथित तौर पर एसोसिएट कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स में डाइवर्ट कर दिया गया।
  • क्वालिटी से समझौता: हाई-राइज टावर्स के लिए तय स्टील और अन्य निर्माण सामग्री की क्वालिटी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

इसके अलावा, डेवलपर्स पर तय समय पर प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा न करने के भी आरोप हैं। कंपनी टोल कलेक्शन और एसेट सेल के जरिए फंड जुटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कमेटी को संदेह है कि इससे काम की रफ्तार बनाए रखना संभव होगा। अब सबकी निगाहें NCLT पर टिकी हैं कि क्या वह सख्त कदम उठाती है या कंपनी के मैनेजमेंट पर कोई गाज गिरती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.