रियल्टी दिग्गज Omaxe ने अपने बिज़नेस विस्तार का रोडमैप तैयार कर लिया है। कंपनी देश के 13 शहरों में **19** होटल बनाएगी, जिस पर कुल **₹6,200 करोड़** खर्च किए जाएंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे खास पहलू इसका फंडिंग मॉडल है, जो नए कर्ज के बजाय रियल एस्टेट बिक्री से आने वाले कैश पर टिका है।
रियल एस्टेट सेक्टर की जानी-मानी कंपनी Omaxe ने अगले 5 सालों में होटल इंडस्ट्री में अपनी पैठ जमाने की बड़ी योजना बनाई है। कंपनी 5 राज्यों में 19 होटल विकसित करने की तैयारी में है। ये होटल अयोध्या, वृंदावन और लखनऊ जैसे धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर पर बनाए जाएंगे।
फंडिंग की अनोखी रणनीति
कंपनी का मैनेजमेंट इस प्रोजेक्ट को कर्ज के जाल में फंसाने के बजाय 'इंटरनल एक्रुअल्स' (Internal Accruals) से फंड करने की योजना बना रहा है। यानी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से जो भी बिक्री होगी, उसी पैसे का इस्तेमाल होटल निर्माण में होगा। यह रणनीति कंपनी के डेट लेवल को तो कंट्रोल में रखेगी, लेकिन एक बड़ा जोखिम भी पैदा करती है—अगर प्रॉपर्टी की बिक्री धीमी रही, तो होटल प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन भी प्रभावित हो सकती है।
पार्टनर्स का सहारा
Omaxe का फोकस सिर्फ एसेट बनाने पर है, मैनेजमेंट के लिए उन्होंने दिग्गजों से हाथ मिलाया है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली के द्वारका में बन रहे 158-की वाले 'Gateway Hotel' का कामकाज Indian Hotels Company Ltd (IHCL), यानी ताज ग्रुप संभालेगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
रियल्टी सेक्टर में कमाई काफी हद तक साइक्लिकल होती है। इस नए कदम से Omaxe को साल दर साल ₹1,000 करोड़ का रिकरिंग रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट में स्थिरता आ सकती है। हालांकि, रियल एस्टेट से होटल ऑपरेशन में शिफ्ट होना आसान नहीं है। निवेशकों को आने वाले समय में इन होटलों के ऑक्यूपेंसी रेट्स (60% से 80%) और कंस्ट्रक्शन की गति पर बारीक नजर रखनी होगी।
