Antique Stock Broking ने Oberoi Realty पर अपना 'Buy' रेटिंग बरकरार रखा है और वित्तीय वर्ष 2028 (FY28) के लिए शेयर का टारगेट प्राइस ₹1,861 तय किया है। यह रेटिंग कंपनी की मजबूत प्रोजेक्ट पाइपलाइन और रेंटल इनकम (rental income) में अनुमानित वृद्धि पर आधारित है। हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि कुछ प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में हो रही देरी के कारण कंपनी की पूरी क्षमता का लाभ उठाने में समय लग सकता है।
Oberoi Realty के पास एक बड़ी डेवलपमेंट पाइपलाइन है, जिसमें चार प्रमुख प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। गुरुग्राम सेक्टर 58 का डेवलपमेंट ₹11,900 करोड़ से अधिक के ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) के साथ करीब 3.4 मिलियन वर्ग फुट (sq ft) में फैला है। इसके अलावा, पेडर रोड प्रोजेक्ट (GDV ₹2,600+ करोड़), आदर्श नगर रीडेवलपमेंट (GDV ₹6,000 करोड़) और एलीसियन टॉवर ई (GDV ₹4,500 करोड़) जैसे प्रोजेक्ट्स भी हैं। Antique Stock Broking का अनुमान है कि इनमें से कम से कम दो प्रोजेक्ट्स वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में बिक्री के लिए लॉन्च हो सकते हैं, जिसमें गुरुग्राम प्रोजेक्ट सबसे आगे होगा। इसके अलावा, अन्य प्रोजेक्ट्स जैसे कि अंधेरी (Tardeo) में बीएमसी रीडेवलपमेंट (GDV ₹3,500 करोड़), बांद्रा रिक्लेमेशन, अलीबाग में लग्जरी विला प्रोजेक्ट और मुलुंड, कार्टर रोड, मल बार हिल्स में मिक्स-यूज डेवलपमेंट भी भविष्य की योजना में शामिल हैं। हालांकि, यह माना जा रहा है कि इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स के लॉन्च FY28 या उसके बाद तक टल सकते हैं, जिससे तत्काल रेवेन्यू (revenue) पर असर पड़ेगा।
कंपनी की रेंटल इनकम एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनुमान है कि FY26 में यह ₹1,000 करोड़ का EBITDA पार कर जाएगी, जिसमें The Westin से लगभग ₹80 करोड़ का अतिरिक्त योगदान होगा। कंपनी के पास थ्री सिक्सटी वेस्ट (Three Sixty West) और मुलुंड जैसे डेवलपमेंट में लगभग ₹5,300 करोड़ मूल्य की तैयार रेजिडेंशियल इन्वेंटरी (ready residential inventory) है, जिससे तुरंत लिक्विडिटी (liquidity) मिल सकती है। पिछले चार तिमाहियों में, इस तैयार स्टॉक से ₹1,640 करोड़ की प्री-सेल्स (pre-sales) जनरेट हुई हैं, जिसके लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता नहीं पड़ी। हाल ही में बांद्रा ईस्ट में 99 साल की लीज पर 11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण भी किया गया है, जिससे सालाना ₹1,600 करोड़ की रेंटल इनकम मिलने की उम्मीद है। ठाणे और वर्ली में विस्तार के साथ-साथ हॉस्पिटैलिटी (hospitality) सेगमेंट में अगले पांच सालों में होटल की कुर्सियों (keys) की संख्या 269 से बढ़ाकर 1,030 करने की योजना है, जो इस सेगमेंट को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
Antique Stock Broking द्वारा FY28 के लिए ₹1,861 का टारगेट प्राइस, Oberoi Realty के नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर 20% का प्रीमियम दर्शाता है, जबकि स्टॉक वर्तमान में 4% के डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। यह टारगेट प्राइस मौजूदा ₹1,475 के ट्रेडिंग प्राइस से 26.16% की संभावित तेजी का संकेत देता है। प्रोजेक्ट लॉन्च में देरी के कारण FY26-FY28 के लिए प्री-सेल्स के अनुमानों को 12-15% तक कम कर दिया गया है, लेकिन ब्रोकरेज ने FY26 में ₹5,400 करोड़, FY27 में ₹6,800 करोड़ और FY28 में ₹7,800 करोड़ की बुकिंग का अनुमान लगाया है। पीयर (peer) कंपनियों की तुलना में, DLF और Prestige Estates जैसे प्रतिस्पर्धी अलग-अलग ग्रोथ और मार्केट पोजिशनिंग के आधार पर P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहे हैं। यह बताता है कि Oberoi Realty का NAV पर प्रीमियम तभी उचित होगा जब एग्जीक्यूशन टाइमलाइन (execution timelines) पूरी होंगी। भारतीय रियल एस्टेट (real estate) के लिए मार्केट सेंटीमेंट (market sentiment) मुख्य शहरी केंद्रों में मजबूत मांग के कारण सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि बढ़ती ब्याज दरें और निर्माण लागत जैसे कारक सेक्टर के लिए चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
अपनी मजबूत एसेट बेस (asset base) के बावजूद, Oberoi Realty को अपनी विस्तृत प्रोजेक्ट पाइपलाइन के कारण महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। प्रोजेक्ट लॉन्च में देरी, जैसा कि पहले ही देखा जा चुका है, रेवेन्यू रिकग्निशन (revenue recognition) और कैश फ्लो की भविष्यवाणी को काफी प्रभावित कर सकती है, जिससे निवेशक का भरोसा कम हो सकता है। प्रतिस्पर्धियों के विपरीत जिनके पास विविध रेवेन्यू स्ट्रीम (revenue streams) हो सकते हैं या तेजी से प्रोजेक्ट टर्नओवर हो सकता है, Oberoi Realty के बड़े, मल्टी-ईयर डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित करने का मतलब है कि योजना या एग्जीक्यूशन में कोई भी चूक वित्तीय रूप से भारी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त, बांद्रा ईस्ट लैंड पार्सल जैसे नए अधिग्रहण और उनके विकास की लागतों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण पूंजी व्यय (capital outlay) वित्तीय संसाधनों पर दबाव डाल सकता है यदि उन्हें कुशलता से प्रबंधित नहीं किया गया। भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर, लचीलापन दिखा रहा है, लेकिन यह स्वाभाविक रूप से चक्रीय (cyclical) है और मैक्रोइकोनॉमिक शिफ्ट्स (macroeconomic shifts), जिसमें ब्याज दरों में बदलाव और नियामक नीतियां शामिल हैं, के प्रति संवेदनशील है, जो प्रीमियम रेजिडेंशियल और कमर्शियल स्पेस की मांग को प्रभावित कर सकते हैं। इन कारकों के कारण कंपनी के वैल्यूएशन (valuation) की सावधानीपूर्वक जांच आवश्यक है।
Antique Stock Broking का Oberoi Realty पर आउटलुक (outlook) सकारात्मक बना हुआ है। वे संशोधित टाइमलाइन को स्वीकार करते हैं, लेकिन अपने टारगेट प्राइस को मजबूत अंडरलाइंग एसेट क्वालिटी (asset quality) और अनुमानित रेंटल इनकम ग्रोथ के आधार पर तय करते हैं। निवेशकों का ध्यान कंपनी की संशोधित लॉन्च शेड्यूल का पालन करने और अपनी महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने की क्षमता पर बना रहेगा।