रियल एस्टेट दिग्गज Oberoi Realty को गुरुग्राम में झटका लगा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कंपनी के 'Oberoi 360 North' प्रोजेक्ट में नई प्रॉपर्टी अलॉटमेंट पर रोक लगा दी है। यह फैसला Advance India Projects Ltd (AIPL) द्वारा लाइसेंस ट्रांसफर और FDI नियमों के अनुपालन को लेकर दायर याचिका के बाद आया है।
क्यों आई प्रोजेक्ट पर रोक?
यह मामला AIPL की उस याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मई 2025 में दिए गए डेवलपमेंट लाइसेंस और जून 2025 में इसके Oberoi Realty को ट्रांसफर की मंजूरी को चुनौती दी है। AIPL का आरोप है कि लाइसेंस देने की प्रक्रिया में हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट, 1975 का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, कंपनी का कहना है कि प्रोजेक्ट की संरचना फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) नियमों के खिलाफ है। AIPL इस जमीन पर अपना दावा भी बता रही है और Oberoi Realty के पक्ष में हुए सेल डीड को रद्द करने की मांग कर रही है।
प्रॉपर्टी की वैल्यू और खरीदारों पर असर
यह गुरुग्राम का एक बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसकी अनुमानित वैल्यू ₹8,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ के बीच बताई जा रही है। कोर्ट के इस फैसले से प्रोजेक्ट में नई बिक्री रुक गई है। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 350 यूनिट्स अलॉट की जा चुकी हैं और इन खरीदारों से कंपनी ने करीब ₹750 करोड़ की रकम भी वसूल ली है। इस रोक से प्रोजेक्ट की बिक्री की रफ्तार थम गई है, जिसका असर खरीदारों और निवेशकों पर पड़ सकता है। हरियाणा डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTCP) इस मामले की समीक्षा कर रहा है और 20 जुलाई, 2026 को इसकी अगली सुनवाई होनी है।
क्या है बैकग्राउंड?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस जमीन पर विवाद उठा हो। AIPL ने बताया कि इसी जमीन को लेकर 2024 में Oberoi Realty और IREO के खिलाफ धोखाधड़ी और मिलीभगत का एक FIR भी दर्ज हुआ था, हालांकि उस FIR से जुड़ी कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। फिलहाल, हाई कोर्ट का यह आदेश राज्य सरकार द्वारा डेवलपमेंट लाइसेंस की समीक्षा लंबित रहने तक एक अस्थायी रोक है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों के लिए आगे सबसे महत्वपूर्ण DTCP की समीक्षा का नतीजा होगा, जो 20 जुलाई को होना है। इस फैसले से यह साफ होगा कि डेवलपमेंट लाइसेंस वैध रहेगा या उस पर कोई और कार्रवाई होगी। निवेशक कंपनी की भविष्य की अर्निंग कॉल्स में भी मैनेजमेंट के कमेंट्री पर नजर रख सकते हैं, ताकि पता चल सके कि इस कानूनी पचड़े का कंपनी के कैपिटल एलोकेशन और NCR में विस्तार की योजनाओं पर क्या असर पड़ सकता है।
