रियल एस्टेट दिग्गज Oberoi Realty को गुरुग्राम में अपने महत्वाकांक्षी 'Three Sixty North' प्रोजेक्ट के लिए बड़ी नियामक मंजूरी मिल गई है। हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTCP) विभाग ने Advance India Projects Limited की याचिका खारिज कर दी है, जिससे प्रोजेक्ट पर लगी रोक हट गई है।
₹16,000 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी
Oberoi Realty के लिए यह एक बड़ी जीत है। हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (DTCP) विभाग ने Advance India Projects Limited (AIPL) की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें गुरुग्राम स्थित कंपनी के प्रमुख प्रोजेक्ट का लाइसेंस रद्द करने की मांग की गई थी। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि Oberoi Realty को मिला डेवलपमेंट लाइसेंस और डेवलपर बदलने की मंजूरी वैध है। इसके साथ ही, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक भी हट गई है, जिससे प्रॉपर्टी अलॉटमेंट और थर्ड-पार्टी राइट्स के निर्माण पर लगी पाबंदियां खत्म हो गई हैं।
'Three Sixty North' प्रोजेक्ट का महत्व
यह डेवलपमेंट Oberoi Realty के लिए बेहद अहम है, क्योंकि कंपनी 'Three Sixty North' नाम से गुरुग्राम के सेक्टर 58 में 14.8 एकड़ में एक लग्जरी रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। यह प्रोजेक्ट कंपनी के नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में विस्तार की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट ने लॉन्च के शुरुआती चरण में ही निवेशकों का ध्यान खींचा है, और कंपनी पहले ही लगभग ₹8,109 करोड़ की बुकिंग दर्ज कर चुकी है। कुल मिलाकर, इस प्रोजेक्ट से ₹16,000 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है।
कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति
आर्थिक मोर्चे पर, Oberoi Realty इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए एक मजबूत स्थिति में है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के अनुसार, कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹544 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 29% अधिक है। इसी अवधि में रेवेन्यू 31.7% बढ़कर ₹1,301 करोड़ हो गया। मार्च 2026 तक, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो सिर्फ 0.16 था, जो दर्शाता है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ कम है और उसके पास बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने के लिए पर्याप्त वित्तीय लचीलापन है।
आगे की राह और जोखिम
हालांकि नियामक मंजूरी मिलने से एक बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गई है, रियल एस्टेट डेवलपमेंट में हमेशा कुछ जोखिम शामिल होते हैं। NCR जैसे नए बाजारों में इतने बड़े प्रोजेक्ट्स को नियामक अनुपालन, सरकारी नीतियों में संभावित बदलाव और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जो प्रोजेक्ट के मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, लग्जरी सेगमेंट में बिक्री की गति बनाए रखने के लिए क्षेत्र में हाई-एंड प्रॉपर्टीज की मांग पर निर्भर रहना होगा।
निवेशक अब साइट पर कंपनी के एग्जीक्यूशन की गति, निर्माण की रफ्तार और टावर्स की डिलीवरी के टाइमलाइन पर नजर रखेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनी NCR बाजार में अपने ऑपरेशंस को सफलतापूर्वक बढ़ा पाती है और अपने मौजूदा पोर्टफोलियो के समान लाभ मार्जिन बनाए रख पाती है।
