Noida और Gurugram में प्रॉपर्टी की कीमतें 2019 के बाद से ज़बरदस्त बढ़ी हैं। Anarock के डेटा के मुताबिक, Noida में 125% और Gurugram में 117% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात ये है कि प्रॉपर्टी की वैल्यू के साथ-साथ रेंटल यील्ड (Rental Yields) भी बढ़ी है, जो निवेशकों के लिए एक दुर्लभ और फायदेमंद स्थिति है।
प्रॉपर्टी की कीमतों में आया बड़ा उछाल
Noida और Gurugram के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में 2019 के बाद से ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी Anarock के डेटा के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही तक Noida में प्रॉपर्टी की कैपिटल वैल्यू 125% बढ़ी है। 2019 में जो प्रॉपर्टी ₹4,795 प्रति वर्ग फुट के भाव से मिल रही थी, वो अब ₹10,780 प्रति वर्ग फुट हो गई है। वहीं, Gurugram में भी कैपिटल एप्रिसिएशन 117% रहा, जहाँ कीमतें ₹6,150 प्रति वर्ग फुट से बढ़कर ₹13,350 प्रति वर्ग फुट तक पहुँच गईं।
रेंटल यील्ड में भी इज़ाफ़ा
आमतौर पर, प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज़ उछाल के बाद रेंटल यील्ड (किराए से होने वाली आय) कम हो जाती है, क्योंकि किराये की दरें प्रॉपर्टी की बढ़ी कीमतों के साथ तालमेल नहीं बिठा पातीं। लेकिन Noida और Gurugram में यह ट्रेंड उल्टा देखने को मिला है। Noida में रेंटल यील्ड 70 bps (Basis Points) बढ़कर 3.2% से 3.9% हो गई। Gurugram ने तो और भी कमाल किया, जहाँ रेंटल यील्ड 80 bps बढ़कर 3.5% से 4.3% पर पहुँच गई।
इस दोहरी बढ़ोतरी का मतलब है कि इन इलाकों में घरों की डिमांड अभी भी मज़बूत है, जिससे मकान मालिक प्रॉपर्टी की खरीद लागत बढ़ने के बावजूद किराया बढ़ाने में कामयाब हो रहे हैं। Anarock का कहना है कि यह ट्रेंड भारत के टॉप 11 हाउसिंग मार्केट में देखा जा रहा है, जहाँ किराए में बढ़ोतरी प्रॉपर्टी की बढ़ी कीमतों को संतुलित कर रही है।
मार्केट ग्रोथ की वजहें?
इस लगातार डिमांड के पीछे कई स्ट्रक्चरल कारण हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का बढ़ना और बड़े कॉर्पोरेट एम्प्लॉयमेंट हब का विस्तार, प्रोफेशनल लोगों को इन शहरों की ओर खींच रहा है। इससे अच्छी क्वालिटी वाले रेजिडेंशियल स्पेस की मांग लगातार बनी हुई है। बेहतर फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी ने उन इलाकों को भी मुख्य बिजनेस डिस्ट्रिक्ट के करीब ला दिया है, जो पहले दूर माने जाते थे।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि रियल एस्टेट सेक्टर मैक्रो इकोनॉमिक साइकल के प्रति संवेदनशील होता है। इंटरेस्ट रेट में बदलाव, जो होम लोन को प्रभावित करते हैं, और नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग, जो सप्लाई तय करती है, इस सेक्टर पर असर डाल सकते हैं। भविष्य में रेंटल यील्ड का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रोफेशनल लोगों की आय में वृद्धि जारी रहती है या नहीं, जो लंबे समय तक ऊँचे किराये का समर्थन कर सके। निवेशक आमतौर पर प्रोजेक्ट डिलीवरी टाइमलाइन और आने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर नज़र रखते हैं, क्योंकि ये किसी खास माइक्रो-मार्केट में लगातार बढ़ोतरी के मुख्य उत्प्रेरक साबित हो सकते हैं।
