एयरपोर्ट के खुलने के महज दो हफ्ते के भीतर ही, रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए इंक्वायरीज़ में 56% का उछाल देखा गया, वहीं कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए यह आंकड़ा 75% तक जा पहुंचा। यह रियल एस्टेट में ज़बरदस्त मोमेंटम (Momentum) को दर्शाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले साल में प्रमुख इलाकों में प्लॉट की कीमतों में 20% और अपार्टमेंट की कीमतों में 25% तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। बता दें कि यमुना एक्सप्रेसवे पर 2020 से 2025 के बीच अपार्टमेंट की कीमतें पहले ही 158% बढ़ चुकी हैं, जबकि प्लॉट वैल्यू 536% बढ़ी है। कुछ इलाकों में तो कीमतें पाँच गुना तक बढ़ी हैं, जिसका मुख्य कारण इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है।
एयरपोर्ट का प्रभाव सिर्फ हाउसिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कई सेक्टर्स में ग्रोथ को बढ़ावा देगा। यह डेवलपमेंट एरिया एविएशन (Aviation) से जुड़ी कंपनियों, लॉजिस्टिक्स सेंटर्स, डेटा सेंटर्स और नई फिल्म सिटी को भी आकर्षित कर रहा है। नोएडा का कमर्शियल ऑफिस मार्केट इससे काफी लाभान्वित होगा। अनुमान है कि ग्रेड-ए (Grade-A) ऑफिस लीज (Lease) सालाना 20-30 लाख वर्ग फुट तक पहुंच सकती है, जो पूरे दिल्ली-NCR मार्केट का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। नोएडा में कुल ऑफिस स्पेस 4.34 करोड़ वर्ग फुट है, जिसमें से 2.66 करोड़ वर्ग फुट Q3 2025 तक ग्रेड-ए+ एसेट्स के तौर पर वर्गीकृत किया गया था।
रियल एस्टेट में ऐसे बूम अक्सर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बाद देखने को मिलते हैं, जहां हाईवे, मेट्रो लाइन और एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स अनडेवलप्ड (Undeveloped) एरिया को रेजिडेंशियल और कमर्शियल हब में बदल देते हैं। 2019 से सितंबर 2024 के बीच, पूरे NCR में हाउसिंग प्राइस 137% बढ़े, जिसमें नोएडा 152% की वृद्धि के साथ गुरुग्राम से भी आगे निकल गया। हालांकि, गुरुग्राम अभी भी NCR का मुख्य बिजनेस और लग्जरी सेंटर है, लेकिन नोएडा किफायती दाम और सुनियोजित विकास के साथ वैल्यू-सीकिंग (Value-seeking) बायर्स को आकर्षित कर रहा है।
इस उत्साह के बावजूद, मार्केट की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) और ओवरसप्लाई (Oversupply) का खतरा बनी हुई है। खास तौर पर यमुना एक्सप्रेसवे पर डेवलपमेंट की तेज रफ्तार इस सवाल को खड़ा करती है कि क्या मार्केट इतने नए घरों और बिज़नेस को एब्जॉर्ब (Absorb) कर पाएगा। नोएडा को गुरुग्राम की तुलना में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के मामले में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में एब्जॉर्प्शन रेट्स में गिरावट देखी गई है, जो गुरुग्राम से अलग है। डेवलपर्स को लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) इश्यूज और अप्रूवल में देरी जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स एयरपोर्ट डेवलपमेंट से प्रेरित लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल (Potential) को लेकर काफी आशावादी हैं। संबंधित इंडस्ट्रीज़ से नौकरियों की अपेक्षित वृद्धि से घरों और कमर्शियल स्पेस की मांग मजबूत बनी रहेगी। सालाना 12-18% की अनुमानित प्राइस ग्रोथ और इंस्टीट्यूशंस (Institutions) की बढ़ती भागीदारी के साथ, नोएडा NCR में एक महत्वपूर्ण लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट स्पॉट बनता जा रहा है।