खरीदारों पर बढ़ी अनुपालन की जिम्मेदारी
रियल एस्टेट लेनदेन से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया गया है। अब सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194-IA को लागू करते हुए, खरीदारों को टैक्स वसूलने का ज़िम्मा सौंपा है। इसका मतलब है कि ₹50 लाख या उससे ज़्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने वाले को 1% TDS (Tax Deducted at Source) काटना होगा। यह कटौती डील के समय या भुगतान के समय, जो भी पहले हो, करनी होगी।
विक्रेता के PAN न होने का बड़ा जोखिम
नए नियमों के तहत, अगर प्रॉपर्टी खरीदार को विक्रेता का पैन (PAN) नहीं मिलता है, तो उसे 20% की दर से TDS काटना होगा। यह खरीदार के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका हो सकता है। ऐसे में, खरीदारों को सौदा करने से पहले विक्रेता की पहचान और उसके टैक्स दस्तावेज़ों की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करनी होगी। TIN-NSDL पोर्टल पर फॉर्म 26QB भरकर इस प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन सारी ज़िम्मेदारी खरीदार पर ही है कि वह सुनिश्चित करे कि दी गई जानकारी विक्रेता के टैक्स प्रोफाइल से मेल खाती हो।
रियल एस्टेट बाजार पर असर
यह कदम प्रॉपर्टी सेक्टर में पारदर्शिता लाने और टैक्स चोरी को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हाई-वैल्यू वाली प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर TDS की ऑटोमेटिक रिपोर्टिंग से टैक्स से बचने की गुंजाइश कम हो गई है। हालांकि, आम निवेशक के लिए, यह एक अतिरिक्त लागत और कागजी कार्रवाई है, जो अल्पावधि में रियल एस्टेट में निवेश के उत्साह को थोड़ा धीमा कर सकती है। कृषि भूमि को इस नियम से बाहर रखा गया है, लेकिन शहरों में होने वाली ज़्यादातर प्रॉपर्टी डील्स अब इस दायरे में आ गई हैं।
