Neo Group अपने अल्टरनेटिव एसेट (Alternative Asset) पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए पहला डेडिकेटेड रियल एस्टेट प्राइवेट क्रेडिट फंड (Real Estate Private Credit Fund) लॉन्च कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी कदम का मकसद भारतीय प्रॉपर्टी डेवलपर्स की ओर से स्ट्रक्चर्ड लोन (Structured Loan) की बढ़ती मांग को पूरा करना और देश के तेजी से बढ़ते प्राइवेट क्रेडिट मार्केट (Private Credit Market) को भुनाना है।
प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में बूम
2025 में, भारतीय प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में $12.4 बिलियन का निवेश 166 डील्स में हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 35% ज्यादा है। रियल एस्टेट ने 2025 के दूसरे हाफ में कुल डील वैल्यू का 42% योगदान दिया।
फंड का लक्ष्य और फोकस
Neo Group का नया फंड 15-20% तक का रिटर्न टारगेट कर रहा है, जो इंडस्ट्री के 18% के औसत रिटर्न के अनुरूप है। यह फंड ₹1,500 से ₹2,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखता है और मुख्य रूप से रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, जैसे कि लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) और कंस्ट्रक्शन लोन (Construction Loan) पर ध्यान केंद्रित करेगा।
रियल एस्टेट टीम को मजबूती
कंपनी ने WSB पार्टनर्स (पहले Walton Street India) के अनुभवी लीडर्स को हायर करके अपनी रियल एस्टेट विशेषज्ञता को मजबूत किया है। मैनेजिंग डायरेक्टर्स कौशिक देसाई, विनीत प्रभुगांवकर और विमल जांगिया की टीम के पास 17 साल से अधिक का संयुक्त अनुभव है और उन्होंने $650 मिलियन से अधिक के प्रोजेक्ट्स को संभाला है। Neo Group, GIFT City में एक फीडर फंड (Feeder Fund) भी स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि विदेशी निवेशकों और एनआरआई (NRI) को टैक्स-कुशल तरीके से आकर्षित किया जा सके।
रियल एस्टेट बाजार की चाल
भारत का रियल एस्टेट सेक्टर $500 बिलियन से अधिक का है और इसके और बढ़ने की उम्मीद है। बैंक लेंडिंग (Lending) के सख्त नियमों के कारण यह सेक्टर प्राइवेट क्रेडिट पर अधिक निर्भर हो रहा है। RERA जैसे सुधारों ने पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है, जिससे डेवलपर की साख पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। रेजिडेंशियल सेल्स वैल्यू FY26 में ₹6.65 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 19% की वृद्धि दर्शाती है।
वित्तीय स्थिति और जोखिम
Neo Group के पास वर्तमान में लगभग ₹1 लाख करोड़ का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) है और इसकी वैल्यूएशन $1 बिलियन से अधिक है (जो फरवरी 2025 में $640 मिलियन थी)। हालांकि, FY24 में कंपनी ने ₹177 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹13.7 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया था। रियल एस्टेट प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर में जोखिम भी हैं, जैसे कि मिड-मार्केट डेवलपर्स पर निर्भरता, मार्केट में मंदी या ब्याज दरों में बढ़ोतरी, जो डेवलपर्स की रीपेमेंट क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। 360 ONE जैसे प्रतिस्पर्धी ₹10,000 करोड़ के रियल एसेट पोर्टफोलियो का प्रबंधन करते हैं, जबकि Motilal Oswal के पास ₹265 करोड़ AUM वाला Nifty Realty ETF है। इन प्रतिस्पर्धियों की मौजूदगी Neo Group के लिए एक चुनौती है।
भविष्य की रणनीति
Neo Group लॉजिस्टिक्स (Logistics), कमर्शियल (Commercial) और स्पेशल सिचुएशन्स (Special Situations) जैसे क्षेत्रों में भी निवेश का विस्तार करने की योजना बना रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट अगले 2-5 साल तक मजबूत ग्रोथ दिखाएगा, जबकि रियल एस्टेट की ग्रोथ धीमी होकर 3-5% की दर से बढ़ेगी। Neo Group की सफलता उसकी रियल एस्टेट साइकिल को संभालने, प्रोजेक्ट्स को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने और अपने विस्तार को स्थायी लाभ में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगी।