बैंक प्रॉपर्टी नीलामी में कानूनी जोखिम: खरीदारों के लिए जरूरी हैं ये जांचें!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
बैंक प्रॉपर्टी नीलामी में कानूनी जोखिम: खरीदारों के लिए जरूरी हैं ये जांचें!
Overview

बैंक कर्ज वसूलने के लिए प्रॉपर्टी की नीलामी बढ़ा रहे हैं, लेकिन डिफॉल्टर इनसॉल्वेंसी कानूनों का इस्तेमाल कर बिक्री को रोक रहे हैं। यह खरीदारों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है, जिससे बोली लगाने से पहले कानूनी जांच-परख बहुत जरूरी हो गई है।

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क्या हो रहा है?

बैंक और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियाँ (ARCs) कर्जदारों की प्रॉपर्टीज़ को नीलाम कर रही हैं। अक्सर इन्हें सस्ते दामों पर रियल एस्टेट खरीदने का मौका बताया जाता है। लेकिन, एक नया ट्रेंड सामने आया है जहाँ कर्जदार इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) और डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल्स (DRT) का इस्तेमाल करके इन नीलामी प्रक्रियाओं को कानूनी तौर पर चुनौती दे रहे हैं या रोक रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि सफल बोली लगाने वाले खरीदार खुद को लंबी कानूनी लड़ाई में फंसा पा सकते हैं, जहाँ प्रॉपर्टी का कब्ज़ा और बिक्री की अंतिम मंजूरी पर सवाल उठ सकते हैं।

'जैसा है, जहाँ है' (As Is Where Is) का रिस्क

निवेशकों को यह समझना बेहद ज़रूरी है कि बैंक की नीलामी 'एज़ इज़ वेयर इज़' (as is where is) आधार पर होती है। इसका सीधा मतलब है कि खरीदार प्रॉपर्टी को उसकी मौजूदा हालत में स्वीकार करता है, साथ ही उस पर मौजूद सभी देनदारियां, भार और कानूनी विवाद भी उसी के हो जाते हैं। अगर कोई कोर्ट केस चल रहा है, अवैध कब्ज़ा है, या प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है, तो ये सब खरीदार की ज़िम्मेदारी बन जाती है। कई खरीदार सिर्फ डिस्काउंटेड कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन छिपे हुए कानूनी या ढांचागत मुद्दों की जांच न करना एक अच्छे सौदे को भारी वित्तीय और कानूनी सिरदर्द में बदल सकता है।

कानूनी दांव-पेच

दो कानूनी ढाँचों के बीच टकराव बढ़ रहा है: SARFAESI एक्ट, जो बैंकों को संपत्ति जब्त कर बकाया वसूलने की इजाजत देता है, और IBC, जो इंसॉल्वेंसी को संभालता है। कुछ कर्जदार व्यक्तिगत इंसॉल्वेंसी के लिए IBC की धारा 96 का इस्तेमाल करते हैं। फाइलिंग से एक अस्थायी रोक (moratorium) लग सकती है, जो वसूली की कार्यवाही पर स्टे का काम करती है। यह एक कानूनी ग्रे एरिया बनाता है जहाँ SARFAESI के तहत शुरू की गई नीलामी अचानक रुक या विलंबित हो सकती है। इन दो कानूनों के तालमेल में अस्पष्टता ने कुछ कर्जदारों को नीलामी प्रक्रिया को रोकने का रास्ता दिया है, जिससे बैंकों और खरीदारों को ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपनी स्थिति का बचाव करना पड़ रहा है।

अदालतों की चिंता

न्यायिक निकाय इस दुरुपयोग पर ध्यान दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, अदालतों ने चिंता जताई है कि इंसॉल्वेंसी कार्यवाही का इस्तेमाल कभी-कभी पुराने डिफॉल्टरों द्वारा कर्ज चुकाने के बजाय केवल देरी करने के लिए एक ढाल के रूप में किया जा रहा है। इसके कारण अदालतों की ओर से प्रतिक्रिया आई है, कुछ अदालतों ने अनावश्यक देरी को रोकने के लिए विशेष आवेदनों को तेजी से निपटाने का निर्देश दिया है। हालाँकि यह नीलामी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि नीलामी खरीदारों के लिए माहौल अभी भी अप्रत्याशित बना हुआ है।

खरीदारों के लिए ज़रूरी जांच

जो निवेशक बैंक नीलामी के माध्यम से प्रॉपर्टी खरीदने पर विचार कर रहे हैं, उन्हें पूरी तरह से जांच-पड़ताल (due diligence) को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह केवल प्रॉपर्टी के स्थान और बेस प्राइस से कहीं ज़्यादा है। खरीदारों को मालिकाना हक के विवादों को सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र टाइटल सर्च (title search) करना चाहिए। यह जांचना भी महत्वपूर्ण है कि क्या प्रॉपर्टी या कर्जदार DRT या अन्य अपीलीय मंचों पर चल रहे किसी मुकदमे में शामिल है। कर्जदार के खिलाफ किसी भी इंसॉल्वेंसी फाइलिंग की जांच करना एक और महत्वपूर्ण कदम है। नीलामी नोटिस की समीक्षा करने और टाइटल की स्थिति को सत्यापित करने के लिए किसी कानूनी विशेषज्ञ को शामिल करने से उन प्रॉपर्टीज़ से बचने में मदद मिल सकती है जो वर्तमान में कानूनी विवादों में फंसी हुई हैं। निवेशकों को इन अवसरों को इस स्पष्ट समझ के साथ देखना चाहिए कि यह प्रक्रिया एक मानक बाजार लेनदेन की तरह सीधी नहीं है और कानूनी चुनौतियों के उत्पन्न होने पर धैर्य की आवश्यकता हो सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.