NRI प्रॉपर्टी बेच रहे हैं? 2025 के नए टैक्स नियमों से हो जाएं सावधान!

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AuthorNeha Patil|Published at:
NRI प्रॉपर्टी बेच रहे हैं? 2025 के नए टैक्स नियमों से हो जाएं सावधान!

लगभग 46% NRI प्रॉपर्टी मालिकों ने भारत में अपनी प्रॉपर्टी बेचने की योजना बनाई है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत, अब प्रॉपर्टी बेचने की प्रक्रिया में नए टैक्स फाइलिंग, FEMA नियमों और पैसे वापस भेजने की लिमिट्स का कड़ाई से पालन करना होगा। इन नियमों को गलत तरीके से समझने पर भारी TDS, जुर्माना और फंड ट्रांसफर में देरी हो सकती है।

प्रॉपर्टी बेचने वालों के लिए बड़ी खबर!

भारतीय रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लगभग 46% नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) प्रॉपर्टी मालिक ग्लोबल निवेश के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से अपनी प्रॉपर्टी बेचने की तैयारी में हैं। हालांकि, जो लोग 1 अप्रैल 2026 के बाद अपने सौदे फाइनल करेंगे, उन्हें नए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत जटिल नियमों का सामना करना पड़ेगा।

TDS और टैक्स सर्टिफिकेट की प्रक्रिया

विक्रेताओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) को मैनेज करना है। नए नियमों के अनुसार, अगर विक्रेता सही डॉक्यूमेंट्स नहीं दे पाता है, तो खरीदार को केवल कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) पर नहीं, बल्कि पूरी बिक्री राशि पर टैक्स काटना पड़ सकता है। इससे भारी रकम फंस सकती है। इसे रोकने के लिए, विक्रेताओं को आमतौर पर फॉर्म 15CA और 15CB की आवश्यकता होती है। फॉर्म 15CA एक ऑनलाइन सेल्फ-डिक्लेरेशन है, जबकि फॉर्म 15CB एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा टैक्स कैलकुलेशन को वेरिफाई करने वाला सर्टिफिकेट है। इनके बिना, बैंक अक्सर इंटरनेशनल रेमिटेंस (धन प्रेषण) प्रोसेस करने से मना कर देते हैं, जिससे बिक्री अटक जाती है।

FEMA और बैंकिंग नियम

फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों का पालन करना भी बेहद ज़रूरी है। भारत में प्रॉपर्टी की बिक्री से होने वाली आय नॉन-रेजिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) खाते में जमा होनी चाहिए। एक आम गलतफहमी रिपेट्रिएशन लिमिट (पैसे वापस भेजने की सीमा) को लेकर होती है। NRI प्रति फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) अपने NRO खाते से भारत से USD 1 मिलियन तक ही बाहर भेज सकते हैं। इस सीमा को पार करने की कोशिश या गलत खातों का उपयोग रेगुलेटरी जांच को ट्रिगर कर सकता है। इसके अलावा, NRE या FCNR खातों से सीधे प्रॉपर्टी की बिक्री का भुगतान नहीं किया जा सकता है, जो कई अनभिज्ञ विक्रेताओं को मुश्किल में डालता है और जुर्माना भी लगता है।

वैल्यूएशन और डबल टैक्सेशन का जोखिम

निवेशकों को प्रॉपर्टी के वैल्यूएशन (मूल्यांकन) को लेकर भी सावधान रहना चाहिए। सरकारी सर्किल रेट से कम कीमत पर प्रॉपर्टी बेचने पर इनकम टैक्स का जुर्माना लग सकता है, क्योंकि अंतर को 'डीम्ड इनकम' (मानी गई आय) माना जाता है। इसके अतिरिक्त, इंटरनेशनल टैक्स प्लानिंग महत्वपूर्ण है। कई NRI अपने निवास के देश और भारत के बीच हुए डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) का लाभ उठाने में विफल रहते हैं। यदि इस समझौते का सही ढंग से उपयोग नहीं किया गया, तो विक्रेता को दोनों देशों में एक ही लाभ पर टैक्स देना पड़ सकता है। इन संधि लाभों का दावा करने और कुल टैक्स बोझ को कम करने के लिए मूल बिक्री विलेख (original sale deed) और लंबे समय तक होल्डिंग के प्रमाण जैसे सटीक दस्तावेज़ आवश्यक हैं।

विक्रेताओं के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण निगरानी यह सुनिश्चित करना है कि उनका परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) सही ढंग से लिंक हो और भारतीय सिस्टम में उनका टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस अपडेटेड हो। बिक्री शुरू करने से पहले, NRI अपने टैक्स रिकॉर्ड और FEMA अनुपालन की पुष्टि के लिए तेजी से सलाह ले रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि फंड की वापसी में कोई अप्रत्याशित अस्वीकृति या देरी न हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.