एनआरआई (NRIs) प्रॉपर्टी डील में TDS का झंझट
जब कोई नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) भारत में अपनी प्रॉपर्टी बेचता है, तो अक्सर उसे एक बड़ी वित्तीय बाधा का सामना करना पड़ता है: प्रॉपर्टी की कुल बिक्री कीमत पर लगने वाला भारी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS)। यह कटौती सीधे तौर पर एनआरआई के हाथ में आने वाले पैसे को काफी कम कर देती है, क्योंकि यह सिर्फ मुनाफे पर नहीं, बल्कि पूरी डील की रकम पर लागू होती है।
जानिए ₹12.5 लाख की TDS मार का गणित
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 195 के तहत, जब कोई एनआरआई (NRI) भारत में प्रॉपर्टी बेचता है, तो खरीदार को TDS काटना अनिवार्य होता है। जहां भारत के सामान्य निवासियों के लिए ₹50 लाख से ऊपर की प्रॉपर्टी पर 1% TDS लगता है, वहीं एनआरआई (NRIs) के लिए यह दर काफी ज़्यादा, लगभग 12.5% (लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर) या फिर स्लैब रेट (शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर, जो 30% के करीब हो सकता है) तक जा सकती है।
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अगर लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट (Lower Deduction Certificate) नहीं लिया गया है, तो यह TDS प्रॉपर्टी की पूरी बिक्री मूल्य पर काटा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई एनआरआई (NRI) ₹1 करोड़ की प्रॉपर्टी बेचता है, और इंडेक्सेशन (Indexation) और अन्य छूटों को ध्यान में रखने के बाद भी वास्तविक कैपिटल गेन (Capital Gain) कम है, तब भी खरीदार पूरी ₹1 करोड़ की रकम पर 12.5% की दर से ₹12.5 लाख का TDS काट सकता है। यह भारी-भरकम रकम इनकम टैक्स विभाग के पास 6 से 12 महीने तक फंसी रह सकती है, जब तक कि एनआरआई अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करके इसका रिफंड (Refund) क्लेम नहीं कर लेता। इससे एनआरआई की तत्काल वित्तीय योजनाएं (Financial Plans) प्रभावित होती हैं।
फॉर्म 128: कम TDS का अचूक समाधान
इस नकदी के फंसने की समस्या से बचने का सबसे कारगर उपाय है - प्रॉपर्टी की बिक्री फाइनल होने से पहले ही लोअर या नील टीडीएस सर्टिफिकेट (Lower or Nil TDS Certificate) के लिए आवेदन करना। यह प्रक्रिया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 (Income Tax Act, 2025) के तहत आती है, जिसके लिए फॉर्म 128 (पहले यह फॉर्म 13 के नाम से जाना जाता था) का उपयोग किया जाता है।
इस फॉर्म के ज़रिए, एनआरआई (NRI) अपने असेसिंग ऑफिसर (Assessing Officer - AO) को यह साबित कर सकते हैं कि उनकी वास्तविक टैक्स देनदारी (Tax Liability) सामान्य TDS दर से बहुत कम है। खरीदार की लागत, इंडेक्सेशन के लाभ और किसी भी अन्य टैक्स छूट के प्रमाणों को TRACES पोर्टल (TRACES portal) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करने पर, ऑफिसर एक सर्टिफिकेट जारी करता है। यह सर्टिफिकेट खरीदार को निर्देश देता है कि वह केवल निर्धारित कम दर पर ही TDS काटे। इस तरह, एनआरआई (NRI) बिना किसी देरी के अपनी पूरी बिक्री रकम प्राप्त कर सकते हैं।
समय और जागरूकता है सबसे ज़रूरी
इस मुद्दे के पीछे एक बड़ा कारण लोगों में जानकारी की कमी है। भले ही इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) गैर-निवासियों से कर संग्रह सुनिश्चित करता है, लेकिन मानक उच्च TDS दरें तब समस्याएं पैदा करती हैं जब वास्तविक मुनाफा कम हो। कई एनआरआई (NRIs) और उनके टैक्स सलाहकार भी लोअर TDS सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने का मौका चूक जाते हैं और रिफंड प्रक्रिया का ही सहारा लेते हैं। यह याद रखना बहुत ज़रूरी है: लोअर TDS सर्टिफिकेट के लिए आवेदन प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी होने और पैसे ट्रांसफर होने से पहले ही किया जाना चाहिए। यदि TDS कटने के बाद आवेदन किया जाता है, तो वह उस बिक्री पर लागू नहीं होगा, और केवल बाद में ही रिफंड संभव होगा।
प्रॉपर्टी के अलावा अन्य आय पर भी लागू
फॉर्म 128 (Form 128) का उपयोग केवल प्रॉपर्टी की बिक्री तक ही सीमित नहीं है। यह अन्य आय स्रोतों पर लगने वाले TDS के लिए भी किया जा सकता है, जैसे कि ब्याज (Interest), रॉयल्टी (Royalty), प्रोफेशनल फीस (Professional Fees) और किराया (Rent), यदि आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी निर्धारित TDS दर से कम है।
प्रक्रियात्मक पहलू और खरीदार की ज़िम्मेदारी
फॉर्म 128 (Form 128) के इस्तेमाल में मुख्य चुनौतियां सूचना की कमी और प्रक्रिया को अपनाने में देरी हैं। यह एक वैध कानूनी विकल्प है, लेकिन इसकी सफलता के लिए करदाताओं का जागरूक होना और तेज़ी से कार्रवाई करना ज़रूरी है। यह प्रक्रिया काफी हद तक TRACES पोर्टल (TRACES portal) के माध्यम से डिजिटल (Digital) है। खरीदारों की भी ज़िम्मेदारी है कि एनआरआई (NRI) से प्रॉपर्टी खरीदते समय, उन्हें सेक्शन 195 (Section 195) के तहत TDS जमा करने के लिए Tax Deduction and Information Number (TAN) की आवश्यकता होती है, जो रेजिडेंट्स के PAN से अलग है। खरीदार द्वारा नियमों का पालन न करने पर जुर्माना और ब्याज लग सकता है।
भविष्य का नज़रिया
भारतीय टैक्स प्राधिकरण (Tax Authorities) डिजिटल अनुपालन (Digital Compliance) को बढ़ावा दे रहे हैं, और TRACES पोर्टल (TRACES portal) जैसे प्लेटफॉर्म फॉर्म 128 (Form 128) के ज़रिए करदाता के अनुभव को बेहतर बनाने और अनावश्यक देरी से बचने में मदद कर रहे हैं। जैसे-जैसे एनआरआई (NRIs) भारत के रियल एस्टेट (Real Estate) और वित्तीय बाजारों (Financial Markets) में अधिक सक्रिय हो रहे हैं, फॉर्म 128 (Form 128) जैसे प्रावधानों का उपयोग और जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। समय पर फॉर्म 128 (Form 128) के लिए आवेदन करके अत्यधिक TDS को कानूनी रूप से कम करना, एनआरआई (NRIs) के लिए भारत में अपनी वित्तीय योजना बनाने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया है।
