Q3 2026 में गुड़गांव और नोएडा जैसे NCR के बाजारों में रियल एस्टेट डिमांड में **8%** से **9%** तक की गिरावट देखी गई है, जबकि इसके उलट बेंगलुरु में खरीदारों की दिलचस्पी में **14%** का उछाल दर्ज किया गया है।
NCR में सुस्ती की वजह
NCR में मांग घटने का मुख्य कारण प्रॉपर्टी के ऊंचे दाम और लक्जरी हाउसिंग पर फोकस करना है। इसके चलते बजट के प्रति संवेदनशील खरीदार मार्केट से दूर हो गए हैं। डेवलपर्स ने इन्वेंट्री जमा होने के डर से नई लॉन्चिंग कम कर दी है। NCR में इस तिमाही में नई लॉन्चिंग 23% घटकर 7,177 यूनिट्स रह गई है। गाजियाबाद, नोएडा और फरीदाबाद का नई सप्लाई में 77% हिस्सा रहा।
बेंगलुरु की चमक बरकरार
NCR के विपरीत, बेंगलुरु का बाजार काफी मजबूत बना हुआ है। यहाँ प्रॉपर्टी की कीमतें सालाना 14.5% बढ़कर औसतन ₹11,293 प्रति वर्ग फीट पर पहुंच गई हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और टेक वर्कफोर्स की मौजूदगी इसके पीछे के मुख्य इंजन हैं। हालांकि, नई लॉन्चिंग में यहां 12% की कमी आई और कुल 15,180 यूनिट्स ही बाजार में आईं।
पुणे और MMR की आक्रामक रणनीति
त्योहारी सीजन का फायदा उठाने के लिए पुणे और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) ने नई परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है। पुणे में सप्लाई में 643% का भारी उछाल आया और 16,192 नई यूनिट्स लॉन्च की गईं। वहीं, MMR में 198% की बढ़त के साथ 20,762 यूनिट्स बाजार में उतारी गईं।
निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या बाजार आने वाली इस सप्लाई को एब्जॉर्ब कर पाएगा या नहीं। यदि डिमांड कम रही और इन्वेंट्री बढ़ती गई, तो डेवलपर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।
