नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में सैकड़ों रिहायशी और कॉमर्शियल बिल्डिंग्स की फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) एक्सपायर्ड हो चुकी हैं, जिससे यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बड़ी लापरवाही को देखते हुए, अथॉरिटीज ने सभी बड़ी इमारतों के लिए अनिवार्य फायर सेफ्टी ऑडिट का ऐलान कर दिया है।
क्या हुआ है?
पूरे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में फायर सेफ्टी को लेकर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां मौजूद कई ऊंची इमारतों, जिनमें रिहायशी टॉवर और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, के फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) एक्सपायर्ड हो चुके हैं या फिर हैं ही नहीं। हाल ही में सामने आए एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा के मुताबिक, गुरुग्राम और नोएडा जैसे प्रमुख शहरों में सैकड़ों इमारतें फायर सेफ्टी के जरूरी मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। क्षेत्र में आग लगने की कई घटनाओं के बाद, स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए सभी प्रमुख कॉम्प्लेक्स, मॉल, ऑफिस टावर और लग्जरी रेजिडेंशियल सोसाइटीज के लिए अनिवार्य और व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट का आदेश दिया है।
क्यों जरूरी है नियमों का पालन और मेंटेनेंस?
चिंता सिर्फ कागजी कार्रवाई की नहीं, बल्कि असल में बिल्डिंग्स की पुरानी पड़ चुकी सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर की है। हालांकि कई बिल्डिंग्स को निर्माण के समय NOC मिल गया था, लेकिन इंस्पेक्शन से पता चलता है कि जब ये प्रोजेक्ट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) या मेंटेनेंस एजेंसियों को सौंप दिए जाते हैं, तो नियमित रखरखाव को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आमतौर पर सामने आने वाली समस्याओं में जंग लगे वाटर पंप, बंद पड़े फायर अलार्म, ब्लॉक हुए इमरजेंसी एग्जिट और स्प्रिंकलर या स्मोक डिटेक्टर जैसे फायर फाइटिंग इक्विपमेंट की कमी शामिल है। कुछ मामलों में, ऊंची इमारतों में ऐसी हाइड्रोलिक सीढ़ियों का अभाव है जो ऊपरी मंजिलों तक पहुंच सकें, जिससे आपातकाल के दौरान फायर डिपार्टमेंट की प्रतिक्रिया उतनी प्रभावी नहीं हो पाती।
प्रॉपर्टी मालिकों के लिए फाइनेंशियल और लीगल रिस्क
यह स्थिति प्रॉपर्टी मालिकों और वहां रहने वाले लोगों के लिए सीधे तौर पर बड़े फाइनेंशियल और लीगल रिस्क पैदा करती है। बीमा कंपनियां अपनी पॉलिसी को लगातार सख्त बना रही हैं; अगर किसी इमारत के पास वैध फायर NOC नहीं है या वह सेफ्टी सिस्टम को मेंटेन नहीं कर रही है, तो आग लगने की स्थिति में इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। इसके अलावा, नियमों का पालन न करने पर राज्य के फायर सर्विस एक्ट के तहत कानूनी पेनल्टी भी लगाई जा सकती है। डेवलपर्स के लिए, खराब सेफ्टी कंप्लायंस की इमेज भविष्य में प्रोजेक्ट अप्रूवल और ब्रांड वैल्यू को नुकसान पहुंचा सकती है, वहीं निवासियों को अपनी प्रॉपर्टी की वैल्यू पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि सत्यापित सेफ्टी स्टेटस की कमी है।
कंप्लायंस की लागत
आधुनिक सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के लिए किसी बिल्डिंग को अपग्रेड करने में काफी खर्चा आ सकता है। इसमें स्मार्ट फायर डिटेक्शन सिस्टम, एड्रेसेबल फायर अलार्म की इंस्टॉलेशन और कुछ मामलों में फायर सप्रेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को रेट्रोफिट करना शामिल है। जहां ये खर्च सुरक्षा और रेगुलेटरी अप्रूवल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं, वहीं ये अक्सर निवासियों, RWAs और फैसिलिटी मैनेजमेंट फर्मों के बीच विवाद का कारण बन जाते हैं। प्रॉपर्टी मालिकों को अब अपनी ड्यू डिलिजेंस के हिस्से के रूप में फायर NOC की वैधता जांचने और फायर फाइटिंग सिस्टम के मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के बारे में पूछताछ करने की सलाह दी जा रही है।
निवेशकों और निवासियों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले महीनों में जिन बातों पर नजर रखनी होगी, उनमें चल रहे सरकारी ऑडिट के नतीजे प्रमुख हैं। अथॉरिटीज ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे सेफ्टी नॉर्म्स को पूरा न करने वाली इमारतों पर पेनल्टी या अस्थायी निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है। निवासियों और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों को इन पर ध्यान देना चाहिए:
- ऑडिट रिपोर्ट्स: क्या सोसाइटी या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का हाल ही में सेफ्टी ऑडिट हुआ है और उन्हें वैध NOC मिली है।
- मेंटेनेंस लॉग्स: फायर पंप, अलार्म और स्प्रिंकलर के नियमित टेस्टिंग के सबूत।
- रेगुलेटरी अपडेट्स: राज्य-विशिष्ट फायर सर्विस नियमों में कोई बदलाव जो सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च को अनिवार्य करता हो।
- इंश्योरेंस कवरेज: वर्तमान फायर सेफ्टी स्टेटस मौजूदा प्रॉपर्टी इंश्योरेंस पॉलिसी को कैसे प्रभावित करता है, इस पर स्पष्टता।
