National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने 16 अटके हुए Supertech हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर एक साफ डेडलाइन मांगी है। ओवरसाइट कमेटी को अब 6 नवंबर तक हर प्रोजेक्ट के लिए अलग से समय सीमा बतानी होगी।
NCLAT का कड़ा रुख
जस्टिस योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने 12 से 36 महीने की अस्पष्ट डेडलाइन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने अब ओवरसाइट कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी के जरिए प्रोजेक्ट-वाइज स्टेटस रिपोर्ट और डिलीवरी की पक्की तारीखें 6 नवंबर तक पेश करें।
NBCC की योजना और टेंडर का गणित
इन प्रोजेक्ट्स में करीब 50,000 घर शामिल हैं। फिलहाल, सरकारी कंपनी NBCC (India) Limited इसके पुनरुद्धार का काम देख रही है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 25 टेंडर जारी किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य ₹9,620 करोड़ के आसपास है। कमेटी का लक्ष्य दिसंबर के अंत तक टेंडर आवंटन की प्रक्रिया पूरी करना है, जबकि प्री-कंस्ट्रक्शन ऑडिट जनवरी 2027 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
बाजार में इस कंपनी को लेकर काफी भ्रम है। निवेशकों को यह स्पष्ट समझना चाहिए कि दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही Supertech Limited और BSE SME पर लिस्टेड Supertech EV Limited (BSE: 544428) दो पूरी तरह अलग कंपनियां हैं। लिस्टेड कंपनी का इन अटके हुए प्रोजेक्ट्स से कोई लेना-देना नहीं है।
फंड की कमी बनी बड़ी चुनौती
इस रिकवरी प्लान में सबसे बड़ी बाधा फंडिंग है। पहले मिली फंडिंग की पेशकशों को ज्यादा ब्याज दरों के कारण ठुकरा दिया गया था। अब समाधान के तौर पर टेंडर में एक 'सेल्फ-फाइनेंसिंग क्लॉज' जोड़ा गया है, जिसके तहत कॉन्ट्रैक्टर्स शुरुआती 6 महीने का निर्माण खर्च उठाएंगे और बदले में उन्हें भुगतान पर ब्याज मिलेगा। क्या यह मॉडल काम करेगा, यह अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
