नतीजों का पोस्टमार्टम: मुनाफे का गणित और गंभीर जोखिम
NBCC (India) Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) की तीसरी तिमाही में शानदार नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 52.88% बढ़कर ₹19,660.26 लाख हो गया। वहीं, कंसॉलिडेटेड (Consolidated) नेट प्रॉफिट में भी 38.46% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹19,721.52 लाख पर पहुंच गया। कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू (Revenue) भी 7.60% की बढ़ोतरी के साथ ₹3,02,239.36 लाख दर्ज किया गया।
इस तिमाही के नतीजों में एक बड़ा फैक्टर 'एक्सेप्शनल आइटम' (Exceptional Item) रहा। कंपनी ने कोच्चि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए ₹8,015.53 लाख के इन्वेंटरी राइट-डाउन (Inventory Write-down) को रिवर्स किया, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा। हालांकि, रियल एस्टेट सेगमेंट ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹10,255.48 लाख और कंसॉलिडेटेड आधार पर ₹10,199.43 लाख का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (Profit Before Tax) दर्ज किया, लेकिन यह राइट-डाउन रिवर्सल प्रोजेक्ट की अंदरूनी मुश्किलों की ओर इशारा करता है।
स्टैंडअलोन सेगमेंट के प्रदर्शन पर गौर करें तो PMC (Project Management Consultancy) से ₹13,018.37 लाख, रियल एस्टेट से ₹10,255.48 लाख और EPC (Engineering, Procurement, and Construction) से ₹1,748.96 लाख का प्रॉफिट बिफोर टैक्स हासिल हुआ।
⚠️ निवेशकों के लिए बड़े रिस्क और गवर्नेंस की गड़बड़ियां
मगर, यह मुनाफे की चमक इन गंभीर चिंताओं को छुपा नहीं सकती। NBCC को कई गंभीर गवर्नेंस (Governance) संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) में SEBI (LODR) रेगुलेशन, 2015 के अनुसार स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की ज़रूरी संख्या, खासकर एक स्वतंत्र महिला निदेशक की कमी है। यह स्थिति कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
इसके अलावा, कंपनी प्रॉपर्टी से जुड़े दर्जनों कानूनी मामलों में फंसी हुई है, जिनमें शामिल हैं:
- लंबित लैंड डीज़ (Pending Land Deeds): नया रायपुर की लीज़ और कन्वेयंस डीज़ (Conveyance Deeds) पर काम रुका हुआ है, और निर्माण अभी शुरू होना है। फरीदाबाद की ज़मीन के लिए कन्वेयंस डीज़ पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) के मसलों के चलते अटकी पड़ी हैं।
- प्रोजेक्ट होल्ड (Project Holds): NBCC प्लाज़ा प्रोजेक्ट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली के साथ अतिरिक्त FAR चार्जेस पर विवाद के कारण रुका हुआ है। कोच्चि प्रोजेक्ट में भी पर्यावरण और वैधानिक मंजूरी (Statutory Approvals) में देरी के चलते बिक्री नहीं हुई है, जिससे बड़ा राइट-डाउन रिवर्सल करना पड़ा।
- स्ट्रक्चरल इश्यूज और प्रोविज़न्स (Structural Issues & Provisions): गुरुग्राम के NBCC ग्रीन व्यू प्रोजेक्ट में स्ट्रक्चरल दरारों के चलते इसे खाली कराया गया था। इसके लिए कंपनी ने भारी भरकम ₹46,882.51 लाख के प्रोविज़न्स (Provisions) और राइट-ऑफ (Write-offs) किए हैं। कंपनी इस मामले में ₹75,000 लाख की रिकवरी सूट (Recovery Suit) भी कर रही है, साथ ही 24 अन्य मुकदमे भी चल रहे हैं।
- टैक्स डिमांड (Tax Demands): कंपनी पर DVAT के ₹40,480.01 लाख की डिमांड थी जिसे रिमांड (Remand) किया गया था, और GST की ₹9,072 लाख की डिमांड थी जिसे सेट असाइड (Set Aside) कर दिया गया था। ये मामले भी पेचीदा बने हुए हैं।
- सब्सिडियरी (Subsidiary) की समस्याएँ: HSCC, जो कि एक सब्सिडियरी है, के साथ बैलेंस रिकंसिलिएशन (Balance Reconciliation) और पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स के फाइनेंशियल क्लोजर (Financial Closures) में पेंडिंग इश्यूज़ हैं।
ऑडिटर की रिपोर्ट (Auditor's Report) भी इन सभी मामलों, जैसे पेंडिंग लैंड डीज़, रेगुलेटरी बाधाओं और जारी लिटिगेशन (Litigations) पर जोर देती है, जो कंपनी के सामने मौजूद ऑपरेशनल चुनौतियों को रेखांकित करते हैं।
मुख्य घटनाएँ
- कंपनी ने 13 फरवरी, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में Q3 FY26 के नतीजे मंजूर किए थे।
- फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ₹0.21 प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) 9 दिसंबर, 2025 को चुकाया जा चुका है।
🚩 जोखिम और आउटलुक
कुल मिलाकर, NBCC के लिए मुख्य जोखिम (Risks) इसके बड़े पैमाने पर कानूनी विवादों, रेगुलेटरी रुकावटों और गवर्नेंस की कमियों से जुड़े हैं। कंपनी की ओर से भविष्य के लिए कोई खास गाइडेंस (Guidance) या आउटलुक (Outlook) स्टेटमेंट नहीं दिया गया है, जिससे निवेशकों को मौजूदा प्रदर्शन और चुनौतियों के आधार पर ही भविष्य का आकलन करना होगा।