फाइनेंशियल ईयर 2026 को ज़बरदस्त विदाई
मुंबई प्रॉपर्टी मार्केट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 का समापन पिछले 10 सालों के सबसे मजबूत मार्च के साथ किया है। इस महीने 15,516 यूनिट्स का रजिस्ट्रेशन हुआ, जिसने ₹1,492 करोड़ की रिकॉर्ड स्टैंप ड्यूटी जनरेट की। यह भारतीय रियल एस्टेट बाज़ार के लिए एक बड़ी ख़बर है, क्योंकि टॉप 7 शहरों में प्रॉपर्टी सेल्स पहली तिमाही (Q1 2026) में 7% घटकर 7% गिर गई थी, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल अनिश्चितताएं और बढ़ती लागतें रहीं। मुंबई की इस मज़बूत परफॉरमेंस के पीछे लगातार एंड-यूज़र डिमांड, स्थिर आर्थिक माहौल और जारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का बड़ा हाथ है।
मिड-सेगमेंट घरों की मांग में तेज़ी
मुंबई के प्रॉपर्टी बाज़ार में एक बड़ा ट्रेंड देखने को मिला है - मिड-सेगमेंट की प्रॉपर्टीज़ की मांग में ज़बरदस्त उछाल। मार्च 2026 में, ₹1-2 करोड़ की कीमत वाली प्रॉपर्टीज़ की बिक्री का हिस्सा बढ़कर 38% हो गया, जबकि पिछले साल यह 32% था। वहीं, ₹1 करोड़ से कम की एंट्री-लेवल प्रॉपर्टीज़ का हिस्सा 46% से घटकर 39% पर आ गया। यह दर्शाता है कि बाज़ार में सिर्फ एंट्री-लेवल खरीदार नहीं, बल्कि मिड-इनकम ग्रुप के लोग भी अपने घरों को अपग्रेड कर रहे हैं, जो वैल्यू ग्रोथ की ओर इशारा करता है। 500-1,000 वर्ग फुट के साइज़ वाले अपार्टमेंट्स अब भी काफी पसंद किए जा रहे हैं, और वेस्टर्न सबर्ब्स जैसे उपनगरीय इलाकों में 56% रजिस्ट्रेशन हुए।
अफॉर्डेबिलिटी पर बढ़ता दबाव
होम लोन की ब्याज दरें भले ही RBI के 5.25% रेपो रेट पर स्थिर हों, लेकिन प्रॉपर्टीज़ की बढ़ती कीमतें अफॉर्डेबिलिटी को मुश्किल बना रही हैं। प्रॉपर्टी वैल्यूज़ इनकम ग्रोथ से ज़्यादा तेज़ रफ़्तार से बढ़ी हैं, जिससे पहली बार घर खरीदने वालों और मिड-इनकम वाले लोगों के लिए चुनौती बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्तर पर, Q1 2026 में हाउसिंग सेल्स में पिछली तिमाही के मुकाबले 7% की गिरावट देखी गई। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और बेंगलुरु ने कुल राष्ट्रीय बिक्री का लगभग 48% हिस्सा कवर किया। मार्च 2026 में 15,516 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि मार्च 2025 में 15,603 यूनिट्स बिकी थीं, जिनसे ₹1,597 करोड़ की स्टैंप ड्यूटी मिली थी। मार्च 2026 में कम स्टैंप ड्यूटी कलेक्शन, जबकि ज़्यादा यूनिट्स की बिक्री, मिड-वैल्यू ट्रांजैक्शन की ओर इशारा करती है।
एंट्री-लेवल खरीदारों के लिए चिंता और भविष्य का जोखिम
हालांकि मार्च 2026 मुंबई के लिए एक रिकॉर्ड महीना रहा, लेकिन एंट्री-लेवल अफॉर्डेबिलिटी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ₹1 करोड़ से कम की प्रॉपर्टीज़ के घटते शेयर और लगातार बढ़ती कीमतों का मतलब है कि कम लोग अब बाज़ार में निचले स्तर पर प्रवेश कर पा रहे हैं। मिड-सेगमेंट खरीदारों पर ज़्यादा निर्भरता, भले ही यह वैल्यू बढ़ाए, बाज़ार को आर्थिक मंदी या ब्याज दर में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है। कंस्ट्रक्शन लागतों में 3-5% (2026 में) की वृद्धि, जो लेबर और मैटेरियल्स की वजह से हो सकती है, कीमतों को और बढ़ा सकती है और डिमांड को सीमित कर सकती है।
बाज़ार का आउटलुक: मज़बूती के साथ चुनौतियां
एक्सपर्ट्स बाज़ार को लेकर सावधान आशावाद दिखा रहे हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के शिशिर बैजल ने खरीदारों के स्थिर आत्मविश्वास और मजबूत बाज़ार फंडामेंटल्स की ओर इशारा किया। फिर भी, बड़े रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है। फाइनेंशियल ईयर 2027 में राष्ट्रीय बिक्री मूल्य ग्रोथ 4-6% रहने का अनुमान है। अच्छी लोकेशन वाले सबअर्बन प्रॉपर्टीज़ और मिड-सेगमेंट घरों की पसंद, साथ ही स्थिर ब्याज दरें, ट्रांजैक्शन एक्टिविटी को स्थिर रखना चाहिए। हालांकि, अफॉर्डेबिलिटी एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।