Mumbai Property: किराए में 11% का उछाल, बाकी बड़े शहर हुए ठंडे!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Mumbai Property: किराए में 11% का उछाल, बाकी बड़े शहर हुए ठंडे!

देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी का किराया बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ गई है, लेकिन मुंबई एक अपवाद बना हुआ है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में औसत किराया इस साल **11%** तक बढ़ गया है, जबकि बाकी बड़े शहरों में यह रफ्तार धीमी हुई है।

क्यों थम रही किराए की रफ्तार?

पिछले तीन सालों में प्रॉपर्टी के किराए में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन अब इसमें नरमी के संकेत मिल रहे हैं। बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली NCR, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों में किराए की वृद्धि धीमी हो गई है।

मुंबई क्यों है खास?

मुंबई में किराए में 11% की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि होम लोन की EMI और किराए के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है, जिससे कई लोग किराए पर रहना ही बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा, लाइफस्टाइल में लचीलेपन की चाहत भी लोगों को लंबे समय तक किराए के मकानों में रहने के लिए प्रेरित कर रही है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट का बोझ

घर खरीदने की राह में एक बड़ी रुकावट सिक्योरिटी डिपॉजिट का भारी बोझ है। भारत के टॉप 6 मेट्रो शहरों में फिलहाल ₹1,26,042 करोड़ की राशि सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसी हुई है। मुंबई और बेंगलुरु में यह रकम सबसे ज्यादा है, क्योंकि यहां किराए और डिपॉजिट की जरूरतें सबसे ज्यादा हैं।

मेट्रो शहरों में अलग-अलग रुझान

बेंगलुरु में किराए की वृद्धि घटकर 7% पर आ गई है, जो 2025 में 8% थी। 2022 से 2024 के बीच यहां दहाई अंकों की वृद्धि देखी गई थी। हैदराबाद में तो यह रफ्तार 9% से घटकर सिर्फ 3% रह गई है। पुणे और चेन्नई में भी यह 6% और 8% पर है, जबकि दिल्ली में किराए में 3% से भी कम की वृद्धि हुई है।

निवेशकों के लिए मौका और किराएदारों पर दबाव

निवेशकों के लिए, छोटे अपार्टमेंट जैसे स्टूडियो और 1 BHK यूनिट्स आजकल ज्यादा बेहतर रेंटल यील्ड दे रहे हैं। बेंगलुरु में इन यूनिट्स पर 4.8% की यील्ड मिल रही है, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसके बाद हैदराबाद 4.6% के साथ दूसरे नंबर पर है। वहीं, बड़े 4 BHK यूनिट्स पर यील्ड 3% से भी कम है।

मुंबई और दिल्ली के किराएदारों पर सबसे ज्यादा आर्थिक दबाव है। मुंबई में 25% किराएदार अपनी कमाई का आधे से ज्यादा हिस्सा किराए पर खर्च कर रहे हैं। वहीं, दिल्ली-NCR में यह आंकड़ा 19% है। ऐसे में, छोटे और किफायती घरों की मांग पर नजर रखना जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.