मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट ने सितंबर में इतिहास रच दिया है। शहर में कुल **12,560** यूनिट्स की रजिस्ट्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले **4%** ज्यादा है। हालांकि, सेल्स वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन में **4%** की गिरावट दर्ज की गई है।
मुंबई के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट के लिए सितंबर का महीना काफी हलचल भरा रहा। गणेश चतुर्थी के दौरान घर खरीदने के शुभ मुहूर्त को देखते हुए, 14 से 25 सितंबर के बीच ही 5,379 यूनिट्स की रजिस्ट्री हो गई। यह साफ दिखाता है कि त्योहारों का असर डिमांड पर कितना गहरा होता है।
स्टैम्प ड्यूटी में क्यों दिखी गिरावट?
एक ओर जहां ट्रांजेक्शन वॉल्यूम बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार का स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन ₹1,242 करोड़ पर सिमट गया, जो कि 4% की गिरावट है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में इस बार लग्जरी अपार्टमेंट्स के बजाय मिड-सेगमेंट या अफोर्डेबल हाउसिंग की बिक्री ज्यादा हुई है। हालांकि, त्योहारी सीजन के दौरान स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन में 32% का उछाल देखा गया और यह ₹640 करोड़ तक पहुंच गया, जो खरीदारों के उत्साह को दर्शाता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और खरीदारों का भरोसा
मुंबई में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार और अटल सेतु (Atal Setu) जैसे प्रोजेक्ट्स नए रेजिडेंशियल कॉरिडोर खोल रहे हैं। इन जगहों पर कनेक्टिविटी बढ़ने से घर खरीदारों के बीच आकर्षण बढ़ गया है। साथ ही, NRI इन्वेस्टर्स के लिए भी इंडियन रियल एस्टेट एक स्टेबल एसेट क्लास बना हुआ है, जिससे शहर के प्रॉपर्टी मार्केट को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
साल की आखिरी तिमाही में निवेशकों को रेपो रेट और होम लोन की दरों पर नजर रखनी होगी। खरीदार अब कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील हैं। ऐसे में बाजार की रफ्तार कायम रखने के लिए डेवलपर्स को कीमतों को स्टेबल रखना होगा। क्या बिना भारी डिस्काउंट के भी डिमांड इसी तरह बनी रहेगी? यह देखने वाली बात होगी।
