बीएमसी के रेवेन्यू में बड़ी उछाल, शहर के विकास को मिलेगी रफ्तार
बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी के बजट अनुमानों के मुताबिक, FY27 में विकास शुल्क से ₹12,050 करोड़ की भारी-भरकम कमाई का लक्ष्य रखा गया है। बिल्डिंग अप्रूवल, निर्माण प्रीमियम और खास तौर पर एडिशनल फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) फीस से मिलने वाली यह रकम बीएमसी के लिए आय का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गई है। इस वित्तीय मजबूती से कोस्टल रोड और सड़कों के कंक्रीटीकरण जैसे बड़े कैपिटल प्रोजेक्ट्स के लिए फंड मिलेगा।
वर्टिकल ग्रोथ का बूस्ट और पॉलिसी का लाभ
जानकारों का मानना है कि मौजूदा डेवलपमेंट कंट्रोल रूल्स का फायदा उठाते हुए बीएमसी मुंबई की स्काईलाइन को और ऊंचा उठाएगी। डेवलपर्स और बीएमसी, खासकर साउथ मुंबई जैसे प्राइम इलाकों में, खाली जमीन के टुकड़ों पर FSI का अधिकतम इस्तेमाल करने की उम्मीद है। यह रणनीति ऐसे शहर में, जहां जमीन की कमी है, सघन निर्माण को बढ़ावा देगी और जगह का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करेगी। इन शुल्कों पर बढ़ती निर्भरता इस बात को भी दर्शाती है कि बीएमसी अपने ₹81,000 करोड़ से ज्यादा के विशाल रिजर्व को कम होने से बचाना चाहती है और आय के मजबूत स्रोत तलाश रही है।
रेवेन्यू की बदलती तस्वीर और मार्केट के रिस्क
FY27 के लिए प्रॉपर्टी टैक्स से होने वाली अनुमानित आय से कहीं ज्यादा विकास शुल्क से राजस्व का अनुमान है, जो बीएमसी के रेवेन्यू स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव का संकेत देता है। नागरिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये शुल्क भविष्य में आय का मुख्य स्रोत बन सकते हैं, जो राज्य सरकार से GST के रूप में मिलने वाले मुआवजे से भी आगे निकल जाएंगे। हालांकि, इस पर इतनी निर्भरता अपने साथ जोखिम भी लाती है। अगर हाउसिंग मार्केट में मंदी आती है या डाउनसाइकिल शुरू होता है, तो बीएमसी की कलेक्शन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। डेवलपर्स द्वारा शुल्क कम करने या किस्तों में भुगतान की मांग के बावजूद, अब तक बीएमसी ने इस पर कोई रियायत देने से इनकार किया है।
साउथ मुंबई में विकास की अपार संभावनाएं
राजस्व जुटाने के लिए साउथ मुंबई जैसे प्राइम लोकेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसकी वजह वहां मौजूद पुरानी जमीनें, सेस्ड बिल्डिंग्स और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स हैं, जहां ज्यादा FSI की अनुमति मिलती है। फंड के इस प्रवाह से ऐसे इलाकों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने में मदद मिलेगी, जहां तंग गलियां और अपर्याप्त यूटिलिटीज जैसी समस्याएं हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के गुलाम जिया इसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए सकारात्मक मानते हैं, जबकि कल्पतरु लिमिटेड के पराग मुनोट सिंगापुर जैसे देशों के उदाहरण देते हैं, जहां सुनियोजित वर्टिकल डेवलपमेंट मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के सहारे रहने की क्षमता को बढ़ाता है। मुंबई में चल रही कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को इस बढ़ती शहरी घनत्व का समर्थन करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।