Max India: ऑडिटर की बड़ी चेतावनी! सब्सिडियरी पर 'गोइंग कंसर्न' का साया, शेयरधारकों की बढ़ी चिंता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Max India: ऑडिटर की बड़ी चेतावनी! सब्सिडियरी पर 'गोइंग कंसर्न' का साया, शेयरधारकों की बढ़ी चिंता
Overview

Max India Limited ने दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में **24.0%** ईयर-ओवर-ईयर (YoY) की बढ़त के साथ **₹43.10 करोड़** का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी को इस तिमाही में **₹42.85 करोड़** का बड़ा नेट लॉस हुआ।

🚨 सबसे बड़ी चिंता: ऑडिटर ने 'गोइंग कंसर्न' पर जताई गंभीर आशंका

Max India Limited के आज जारी हुए वित्तीय नतीजों में सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंपनी की एक अहम सब्सिडियरी Max UK Limited की भविष्य की व्यवहार्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कंपनी के ऑडिटर Ravi Rajan & Co. LLP ने Max UK Limited के लिए 'मटेरियल अनसर्टेनिटी रिलेटिंग टू गोइंग कंसर्न' (Material Uncertainty relating to Going Concern) की रिपोर्ट दी है। यह सब्सिडियरी पहले ही अपनी सेवाएं बंद कर चुकी है और अब संचालन पूरी तरह बंद करने की योजना बना रही है, जिससे ग्रुप की ओवरऑल स्ट्रेटेजी पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

📊 कंसोलिडेटेड परफॉरमेंस: रेवेन्यू बढ़ा, पर घाटा गहराया

कंसोलिडेटेड स्तर पर, Q3 FY26 में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 24.0% का जोरदार उछाल आया और यह ₹43.10 करोड़ पर पहुंच गया। कुल आय 27.4% बढ़कर ₹49.81 करोड़ रही। इन सबके बावजूद, कंपनी का नेट लॉस ₹42.85 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹44.60 करोड़ के लॉस से थोड़ा कम है। बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) सुधरकर (₹8.17) रहा, जबकि पिछले साल यह (₹10.03) था।

हालांकि, नौ महीनों (9MFY26) के लिए तस्वीर थोड़ी धुंधली है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 20.1% बढ़कर ₹124.93 करोड़ हुआ, लेकिन नेट लॉस बढ़कर ₹102.56 करोड़ हो गया, जो पिछले साल 9MFY25 के ₹94.30 करोड़ के लॉस से अधिक है। नौ महीनों के लिए ईपीएस (₹20.26) रहा, जो पिछले साल के (₹21.20) से बेहतर है।

📉 स्टैंडअलोन परफॉरमेंस: रेवेन्यू गिरा, लॉस बढ़ा

स्टैंडअलोन लेवल पर कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा। Q3 FY26 में रेवेन्यू 31.8% गिरकर महज ₹3.13 करोड़ रह गया। वहीं, नेट लॉस बढ़कर ₹3.20 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹0.95 करोड़ था। स्टैंडअलोन ईपीएस (₹0.61) रहा, जो पिछले साल (₹0.21) था।

हालांकि, स्टैंडअलोन नौ महीनों (9MFY26) के नतीजों में सुधार दिखा, जहां ₹2.10 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹0.76 करोड़ का नेट लॉस था। ईपीएस ₹0.41 रहा, जो पिछले साल (₹0.18) था।

⚖️ कानूनी पेंच और फंड्स

ऑडिटर की रिपोर्ट के अलावा, कंपनी 'अंतरा नोएडा फेज I' प्रोजेक्ट से जुड़े एक जॉइंट वेंचर (JV) के 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे लीगल प्रोसीडिंग्स का सामना कर रही है। यह मामला Contend Builders Private Limited (CBPL) के साथ है और इसका नतीजा अभी अनिश्चित है।

कंपनी ने अपने राइट्स इश्यू से प्राप्त ₹59.30 करोड़ की राशि का उपयोग किया है, जबकि ₹64.93 करोड़ की रकम अभी भी अनयूटिलाइज्ड पड़ी है।

प्रबंधन की ओर से भविष्य के प्रदर्शन को लेकर कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (forward-looking guidance) नहीं दी गई है।

🚩 मुख्य जोखिम और आगे का रास्ता

Max India के लिए मुख्य जोखिम Max UK Limited की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति और 'अंतरा नोएडा' प्रोजेक्ट से जुड़े कानूनी मामलों का अनसुलझा नतीजा हैं। नौ महीनों में कंसोलिडेटेड लेवल पर लॉस का बढ़ना, रेवेन्यू में ग्रोथ के बावजूद, कंपनी के लिए प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने की चुनौतियों को उजागर करता है। बड़े पैमाने पर अनयूटिलाइज्ड राइट्स इश्यू फंड्स के इस्तेमाल को लेकर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। गाइडेंस की कमी निवेशकों के लिए अनिश्चितता और बढ़ाती है।

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