Max Estates के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। जहां कंपनी की प्री-सेल्स (Pre-sales) में **14 गुना** का तूफानी उछाल आया है, वहीं नेट प्रॉफिट **40.2%** गिरकर **₹4.67 करोड़** पर आ गया है।
Max Estates के दूसरी तिमाही के नतीजे दो अलग-अलग तस्वीरों को दिखाते हैं। एक तरफ कंपनी के प्रोजेक्ट्स की भारी मांग है, तो दूसरी तरफ कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 40.2% घटकर ₹4.67 करोड़ रह गया है।
दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट तब आई है जब कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8.06% बढ़कर ₹52.7 करोड़ तक पहुंच गया। मुनाफे में कमी की मुख्य वजह ऑपरेटिंग मार्जिन (EBITDA margin) में भारी गिरावट है, जो पिछले साल के 20.68% से घटकर इस बार 9.89% पर सिमट गया है।
सेल्स मोमेंटम और प्रोजेक्ट्स का दम
रिपोर्ट का सबसे मजबूत हिस्सा प्री-सेल्स का आंकड़ा है, जो पिछले साल के मुकाबले 14 गुना बढ़कर ₹2,092 करोड़ पर पहुंच गया। इस ग्रोथ में गुरुग्राम के 'Estate 361' प्रोजेक्ट का बड़ा योगदान रहा, जिसने अकेले ₹962 करोड़ की बुकिंग हासिल की। इसके अलावा 'Max One' और 'Estate 105' ने भी कंपनी के कलेक्शन को दोगुना करके ₹560 करोड़ तक पहुंचाने में मदद की है।
कंपनी अपनी आक्रामक रणनीति के तहत ₹29,000 करोड़ से ज्यादा के डेवलपमेंट पाइपलाइन पर काम कर रही है, जिसमें गाजियाबाद के इंदिरापुरम और वेस्ट दिल्ली के नए प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
फाइनेंशियल हेल्थ और आगे की चुनौतियां
कंपनी का डेट मैनेजमेंट फिलहाल नियंत्रण में है। 30 सितंबर, 2026 तक कंपनी पर कुल ₹2,117 करोड़ का कर्ज था, जिसके मुकाबले उनके पास ₹1,898 करोड़ की नकदी मौजूद है। नेट डेट लगभग ₹219 करोड़ है। हालांकि, इतने बड़े डेवलपमेंट पाइपलाइन को हकीकत में बदलने के लिए कंपनी को बिना किसी देरी या लागत वृद्धि के काम पूरा करना होगा। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्या आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपने मार्जिन में सुधार कर पाएगी या नहीं।
