भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब ऑफिस स्पेस की मांग में सबसे आगे आ गई हैं। उन्होंने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के जरिए 2026 की पहली छमाही में **15.8 मिलियन वर्ग फुट** जगह लीज पर ली है, जो कुल लीजिंग का **41.7%** है।
इंजीनियरिंग और AI की ओर झुकाव
यह सिर्फ बैक-ऑफिस का काम नहीं है। ग्लोबल कंपनियां अब अपने भारतीय सेंटर्स में प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंजीनियरिंग जैसे हाई-वैल्यू फंक्शन शिफ्ट कर रही हैं। इसके लिए उन्हें बड़े, मॉडर्न और हाई-क्वालिटी कैंपस की जरूरत है। रिटेल, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनियां भी इस इकोसिस्टम में शामिल हो रही हैं, जिससे कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग और विविध हो गई है।
मार्केट में मजबूती, खाली जगह कम
हालांकि, ग्लोबल अनिश्चितताओं और कंपनियों द्वारा अपने मौजूदा पोर्टफोलियो को ऑप्टिमाइज़ करने के कारण कुल ऑफिस लीजिंग में 3.9% की गिरावट आई और यह 37.9 मिलियन वर्ग फुट पर आ गई, लेकिन GCCs की मांग स्थिर बनी हुई है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में GCC लीजिंग एक्टिविटी में 14.2% की वृद्धि हुई है। इससे ऑफिसों में खाली पड़ी जगह (vacancy rates) पिछले पांच सालों के निचले स्तर 14.5% पर बनी हुई है। यह दिखाता है कि जहां मार्केट सेंटीमेंट पर दबाव है, वहीं हाई-क्वालिटी, इनोवेशन-केंद्रित ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए यह ट्रेंड बताता है कि ग्रेड A ऑफिस स्पेस और बिजनेस पार्क पर फोकस करने वाले डेवलपर्स को अन्य रियल एस्टेट सेगमेंट्स की तुलना में अधिक स्थिर मांग देखने को मिल सकती है। भारत में प्रोडक्ट ओनरशिप और इनोवेशन की ओर यह बदलाव एक लंबी अवधि का स्ट्रक्चरल थीम है, न कि कोई अस्थायी उछाल। हालांकि, मार्केट का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्लोबल कंपनियां अपनी विस्तार योजनाओं को बनाए रखती हैं या नहीं और भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर इन बड़े टेक्निकल हब का समर्थन जारी रख पाता है या नहीं। प्रमुख टेक्नोलॉजी कॉरिडोर में लीजिंग रेट्स और बड़े कमर्शियल रियल एस्टेट डेवलपर्स के तिमाही प्रदर्शन पर नजर रखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या 2026 के बाकी हिस्सों में GCC-संचालित यह ग्रोथ ट्रेंड जारी रहेगा।
