Maharashtra Minor Mineral Royalty Rule: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, वापस लिया विवादित नियम

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AuthorAditya Rao|Published at:
Maharashtra Minor Mineral Royalty Rule: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, वापस लिया विवादित नियम

महाराष्ट्र सरकार ने रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए माइनर मिनरल (छोटे खनिजों) पर लगने वाली रॉयल्टी से जुड़ा एक विवादित नियम वापस ले लिया है। यह फैसला मई 2023 की उस पॉलिसी को रद्द करता है, जिसके तहत जमीन के आकार के हिसाब से रॉयल्टी तय होती थी, न कि निकाले गए खनिजों की मात्रा के अनुसार।

क्यों वापस लिया गया नियम?

महाराष्ट्र सरकार के राजस्व और वन विभाग ने 9 जुलाई को जारी एक आदेश में मई 2023 के उस सर्कुलर को रद्द कर दिया है, जिसमें मिट्टी और पत्थर जैसे छोटे खनिजों की रॉयल्टी की गणना निर्माण और जमीन विकास परियोजनाओं के लिए की जाती थी। पिछला नियम इस बात पर आधारित था कि जमीन कितनी बड़ी है, न कि उससे असल में कितना खनिज निकाला गया है।

इस तरीके से रॉयल्टी तय होने पर डेवलपर्स को अक्सर मनमाने ढंग से पेनल्टी (जुर्माना) देनी पड़ती थी, जिसके खिलाफ उन्होंने कई कानूनी याचिकाएं दायर की थीं। सरकार ने माना है कि 2023 का यह तरीका सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों के खिलाफ था।

इस बदलाव से निर्माण कंपनियों को उम्मीद है कि अब अचानक लगने वाले टैक्स या पेनल्टी के जोखिम कम होंगे, जिससे प्रोजेक्ट की प्लानिंग आसान हो जाएगी।

डेवलपर्स के लिए क्या बदलेगा?

जब तक कोई नया नियम नहीं बनता, तब तक खनिज निकालने और ट्रांसपोर्ट करने का काम 2013 के महाराष्ट्र माइनर मिनरल एक्सट्रैक्शन (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) रूल्स के तहत ही होगा। इस कदम का मकसद फील्ड ऑफिसर्स के मनमाने फैसलों पर लगाम लगाना भी है, जो 2023 के फॉर्मूले का इस्तेमाल करके बिल्डरों और ठेकेदारों से वसूली कर रहे थे।

सरकार का कहना है कि वे एक पारदर्शी पॉलिसी बनाएंगे, जो राज्य के राजस्व को सुरक्षित रखने और कानूनी नियमों का पालन करने के बीच संतुलन बनाएगी। इसका लक्ष्य एक ऐसा सिस्टम बनाना है जहाँ खनिज निकालने की लागत का सटीक अनुमान लगाया जा सके और भविष्य में कानूनी विवादों को कम किया जा सके।

आगे क्या?

रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े लोगों को अब सरकार के नए नियम या सर्कुलर पर नजर रखनी होगी। यह देखना अहम होगा कि सरकार कितनी जल्दी नया फ्रेमवर्क लाती है और क्या वह मात्रा-आधारित गणना का तरीका अपनाती है, जो इंडस्ट्री की जरूरतों को भी पूरा करे। साथ ही, यह भी साफ होना चाहिए कि पुराने, रद्द किए गए नियम के तहत चल रहे विवादों का निपटारा कैसे होगा।

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