महाराष्ट्र सरकार ने हाउसिंग सोसाइटी रिडेवलपमेंट के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। अब पारदर्शी प्रक्रिया के लिए अनिवार्य बिडिंग, मीटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग और काम पूरा करने के लिए सख्त **2 साल** की डेडलाइन तय कर दी गई है।
महाराष्ट्र सरकार ने हाउसिंग सोसाइटी के रिडेवलपमेंट को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 30 सितंबर 2026 से प्रभावी होने वाले ये नए नियम मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे प्रोजेक्ट्स में देरी और विवादों को रोकने के लिए लाए गए हैं।
नई प्रक्रिया और चुनौतियां
अब किसी भी सोसाइटी को डेवलपर चुनने के लिए कम से कम 3 प्रतिस्पर्धी बोलियां (Bids) हासिल करनी होंगी। अगर बोलियां नहीं मिलती हैं, तो टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डेवलपर चयन की हर बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, चयन प्रक्रिया के लिए कम से कम 51% सदस्यों की उपस्थिति और सहमति जरूरी होगी, जिससे भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों को कम किया जा सके।
टाइमलाइन और कैश फ्लो पर असर
डेवलपर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रोजेक्ट पूरा करने की डेडलाइन है। अब प्लिंथ सर्टिफिकेट मिलने के 2 साल के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य होगा। असाधारण मामलों में ही इसे अधिकतम 3 साल तक खींचा जा सकेगा। इसके अलावा, निवासियों को घर खाली करने से पहले ही परमानेंट रेंट और सिक्योरिटी डिपॉजिट के समझौते रजिस्टर कराने होंगे। इससे छोटे डेवलपर्स के कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उन्हें प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही बड़ी रकम का इंतजाम करना होगा।
रियल एस्टेट सेक्टर में बदलाव
ये नियम सेक्टर में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं। बड़ी और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां इन नियमों को बेहतर ढंग से लागू कर पाएंगी, जबकि छोटे डेवलपर्स के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि आने वाले समय में प्रोजेक्ट की लागत और मार्जिन पर इसका क्या असर पड़ता है। हालांकि, यह कदम सेक्टर को अधिक संगठित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
