महाराष्ट्र सरकार ने कल्याण में स्थित **174 एकड़** जमीन के विवादित सौदे की जांच के लिए एक **9-सदस्यीय** स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। यह जमीन 1960 के दशक में सरकारी चारागाह के रूप में दर्ज थी।
जांच का दायरा और SIT की भूमिका
महाराष्ट्र सरकार ने कोंकण डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक 9-सदस्यीय टीम बनाई है, जिसे 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। यह जमीन मूल रूप से सरकारी 'गुरचरण' (चारागाह) के तौर पर चिन्हित थी, जिसे 1960 के दशक की शुरुआत में Premier Automobiles को इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए दिया गया था। पिछले 60 वर्षों में इस जमीन के कई टुकड़े हुए और मालिकाना हक बदले गए, जिससे यह पूरा मामला बेहद जटिल हो गया है।
किन कंपनियों पर है नजर?
SIT मुख्य रूप से जमीन के क्लास-II से क्लास-I स्टेटस में बदलाव की वैधता की जांच करेगी। इस दायरे में कई बड़ी कंपनियां और सरकारी संस्थान शामिल हैं, जिनमें प्रमुख नाम हैं: Macrotech Developers (Lodha), Runwal, Sundarniwas Properties, Anant Developers, Out N Out Infotech, और Jupiter Life Line। इसके अलावा, Indian Railways और Maharashtra State Electricity Board की जमीन के हिस्सों की भी पड़ताल की जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह जांच चिंता का विषय है क्योंकि किसी भी प्रोजेक्ट की नींव उसके 'क्लियर लैंड टाइटल' पर टिकी होती है। यदि SIT को दशकों पुराने किसी भी ट्रांसफर में अनियमितता मिलती है, तो वर्तमान में जमीन पर काबिज कंपनियों के लिए कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या सरकार जमीन के स्टेटस को दोबारा बदलती है या कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाती है। यह कदम राज्य सरकार द्वारा जमीन के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती सख्ती का संकेत है, जिससे प्रभावित कंपनियों के कामकाज में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा।
