महाराष्ट्र सरकार ने 1971 के 'स्लम एरिया एक्ट' की ऑडिट के लिए **11** सदस्यों वाली कमेटी बनाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रही इस **10** महीने की समीक्षा का मकसद कानूनी अड़चनों को दूर कर स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट्स को तेज करना है।
ऑडिट का मकसद और कमेटी
महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर 'महाराष्ट्र स्लम एरिया (इम्प्रूवमेंट, क्लीयरेंस एंड रीडेवलपमेंट) एक्ट, 1971' का परफॉरमेंस ऑडिट शुरू कर दिया है। हाउसिंग डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की अगुवाई में 11 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी ने इस हफ्ते अपनी पहली बैठक की है। यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें कोर्ट ने माना था कि कानूनी और पॉलिसी संबंधी जटिलताएं शहरी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में देरी की सबसे बड़ी वजह हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मायने
कमेटी को कानून में बदलाव के सुझाव देने के लिए 10 महीने का समय दिया गया है। मुंबई में स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले डेवलपर्स के लिए यह एक बड़ा घटनाक्रम है। ये प्रोजेक्ट्स अक्सर पेचीदा होते हैं और लंबी देरी के कारण निवेशकों की पूंजी फंस जाती है, जिससे मुनाफे पर भी असर पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इस ऑडिट के दो पहलू हैं। सकारात्मक पक्ष यह है कि अगर कमेटी कानूनी ढांचे को सरल बनाने और विवाद कम करने में सफल रहती है, तो प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे और कैश फ्लो में सुधार आएगा। हालांकि, 10 महीने की इस ऑडिट अवधि के दौरान एक 'वेट एंड वॉच' का माहौल भी रह सकता है। इस दौरान पॉलिसी स्पष्टता के इंतजार में नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी या लॉन्चिंग की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।
कमेटी हाउसिंग सोसायटियों, लीगल एक्सपर्ट्स और डेवलपर्स से फीडबैक लेगी। साथ ही, फाइनेंस, इंजीनियरिंग और टाउन प्लानिंग के जानकारों की एक सब-कमेटी भी डेटा जुटाने में मदद करेगी। फिलहाल, निवेशकों के लिए सरकार की ओर से मिलने वाली कोई भी अंतरिम गाइडेंस या प्रोग्रेस रिपोर्ट सबसे अहम होगी।
