भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए जून तिमाही के नतीजे शानदार रहने की उम्मीद है। लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग की मजबूत मांग ने बाजार की चिंताओं को कम कर दिया है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस सेक्टर का रेवेन्यू **15.5%** बढ़ सकता है, जबकि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से बढ़ती दिलचस्पी के कारण कमर्शियल लीजिंग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
लग्जरी घरों की धूम, रियल एस्टेट में तेजी
कोरोना के बाद से भारतीय रियल एस्टेट में लग्जरी और प्रीमियम प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ रही है। इस वजह से टॉप रियल एस्टेट डेवलपर्स के जून तिमाही के नतीजे काफी मजबूत रहने का अनुमान है। भले ही टॉप 7 शहरों में रेजिडेंशियल सेल्स में 6% की गिरावट देखी गई हो, लेकिन यह गिरावट मिड-इनकम सेगमेंट तक सीमित है। वहीं, लग्जरी और ब्रांडेड हाउसिंग सेगमेंट पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है।
क्या कहते हैं एनालिस्ट्स?
इंडस्ट्री के एनालिस्ट्स का मानना है कि यह तिमाही रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छी रहेगी। HDFC Securities का अनुमान है कि Q1FY27 में लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों का रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 15.5% बढ़ सकता है। साथ ही, EBITDA में 35.7% और नेट प्रॉफिट में 14.6% का इजाफा देखने को मिल सकता है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स के सफल लॉन्च और बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी के कारण मार्जिन में लगभग 55 बेसिस पॉइंट्स का सुधार होने की उम्मीद है।
टॉप डेवलपर्स का प्रदर्शन
Godrej Properties, Sobha, Prestige Estates और Mahindra Lifespaces जैसे डेवलपर्स, जो ब्रांडेड प्रीमियम हाउसिंग पर फोकस कर रहे हैं, उनके प्री-सेल्स के आंकड़े मजबूत रहने की उम्मीद है। अनुमान है कि Godrej Properties इस सेगमेंट में सबसे आगे रहेगी, जिसके प्री-सेल्स ₹8,000 करोड़ रहने का अनुमान है। Prestige Estates के ₹6,000 करोड़ प्री-सेल्स की उम्मीद है। Lodha Developers, Sobha, DLF और Mahindra Lifespaces जैसे नाम भी अपनी मजबूत प्रोजेक्ट पाइपलाइन के दम पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
कमर्शियल रियल एस्टेट का जलवा
रेजिडेंशियल के अलावा, कमर्शियल रियल एस्टेट भी एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम बना हुआ है। Q1 2026 में ऑफिस लीजिंग रिकॉर्ड 21.5 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 10.2% ज्यादा है। इसकी एक बड़ी वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से लगातार बनी हुई मांग है, जिन्होंने कुल लीजिंग एक्टिविटी का लगभग 46% हिस्सा कवर किया। इस डिमांड ने पैन-इंडिया ऑफिस वैकेंसी रेट को 5 साल के निचले स्तर 14.7% पर ला दिया है, जिससे डेवलपर्स के लिए रेंटल इनकम की विजिबिलिटी बढ़ गई है।
आगे क्या उम्मीद करें?
लग्जरी हाउसिंग की डिमांड भले ही मजबूत है, लेकिन सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं। मिड-इनकम सेगमेंट में मंदी देखी गई है और अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टी की बिक्री की रफ्तार में भी अंतर है। जहां बेंगलुरु और मुंबई में अच्छी तेजी बनी हुई है, वहीं गुरुग्राम जैसे शहरों में बिक्री की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।
निवेशकों को अब डेवलपर्स द्वारा इन हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स के एक्जीक्यूशन पर नजर रखनी होगी। साथ ही, यह देखना होगा कि क्या डेवलपर्स सितंबर तिमाही में भी अपनी प्री-सेल्स की रफ्तार बनाए रख पाते हैं। लॉन्च टाइमलाइन, कच्चे माल की लागत का प्रॉफिट मार्जिन पर असर, और ऑफिस लीजिंग की मांग कितनी बनी रहती है, ये कुछ ऐसे अहम फैक्टर होंगे जिन पर निवेशकों को ध्यान देना होगा।
