Lutyens Delhi प्रॉपर्टीज़: किराया ₹20 लाख पार! जानिए क्यों है सप्लाई की इतनी कमी?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Lutyens Delhi प्रॉपर्टीज़: किराया ₹20 लाख पार! जानिए क्यों है सप्लाई की इतनी कमी?

दिल्ली के पॉश लुटियंस बंगलो ज़ोन (Lutyens Bungalow Zone) में प्रॉपर्टीज़ का किराया रिकॉर्ड ₹20 लाख प्रति माह तक पहुंच गया है। इसकी मुख्य वजह है प्रॉपर्टीज़ की भारी कमी। इस इलाके में प्राइवेट घरों की सप्लाई बेहद कम है, क्योंकि सख्त हेरिटेज नियमों और सरकारी ज़मीन के नियमों के चलते नई प्रॉपर्टीज़ बन नहीं पातीं। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दिखाता है कि ऐसे मार्केट में जहां लिक्विडिटी लगभग ज़ीरो है, अल्ट्रा-लग्ज़री प्रॉपर्टीज़ की डिमांड कितनी तेज़ी से बढ़ रही है।

लुटियंस दिल्ली में किराया रिकॉर्ड ऊंचाई पर

दिल्ली के लुटियंस बंगलो ज़ोन (LBZ) में प्रॉपर्टीज़ का किराया अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। कुछ हाई-एंड प्रॉपर्टीज़ का किराया ₹20 लाख प्रति माह तक हो गया है। यह उछाल किसी नई कंस्ट्रक्शन के कारण नहीं, बल्कि इसके बिल्कुल उलट है: भारत के सबसे एक्सक्लूसिव रियल एस्टेट इलाकों में से एक में प्रॉपर्टीज़ की लगातार और भयानक कमी।

आखिर क्यों है इतनी कमी?

LBZ लगभग 28 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसमें करीब 3,000 बंगले हैं। हालांकि, इनमें से ज़्यादातर बंगले मंत्रियों, जजों और सीनियर अधिकारियों के लिए सरकार के पास हैं। केवल लगभग 600 प्रॉपर्टीज़ ही प्राइवेट मालिकाना हक़ वाली हैं। भारत के सबसे अमीर परिवारों के लिए ये घर 'ट्रॉफी एसेट्स' माने जाते हैं और ये शायद ही कभी मार्केट में आते हैं। जब मालिक प्रॉपर्टी खाली करते हैं, तो सीमित सप्लाई के कारण किराए में तेज़ी से उछाल आता है, जो हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों (HNIs), डिप्लोमैट्स और सीनियर कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स की डिमांड को पूरा करता है।

सरकारी नियम और सप्लाई पर असर

सप्लाई कम रखने में रेगुलेटरी माहौल एक बड़ा फैक्टर है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) प्रॉपर्टी की स्थिति को लेकर सख्त नियम बनाए रखता है, खासकर लीजहोल्ड ज़मीन को फ्रीहोल्ड में बदलने को लेकर। 2022 से इन रेगुलेटरी बाधाओं ने कई ट्रांजैक्शन्स को रोक दिया है, जिससे प्रॉपर्टीज़ के खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं और संभावित इन्वेंट्री फंसी हुई है।

डेवलपर की नई रणनीति

इस ज़ोन में एक स्टैंडअलोन बंगला खरीदना लगभग असंभव होने के कारण, मार्केट बदल रहा है। डेवलपर्स अब मैनेज्ड लग्ज़री रेजिडेंस ला रहे हैं - जैसे कि सेंट्रल दिल्ली और उसके आसपास बुटीक अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स। ये प्रोजेक्ट्स लुटियंस एड्रेस का रुतबा और हाई-एंड होटल की सुविधाएं देते हैं। ये मैनेज्ड रेजिडेंस फिलहाल उन अमीर लोगों की डिमांड को पूरा कर रहे हैं जो इस इलाके की एक्सक्लूसिविटी चाहते हैं, लेकिन बंगला हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

मार्केट की हकीकत: इल्लिक्‍विडिटी

इन्वेस्टर्स और मार्केट ऑब्ज़र्वर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह सेगमेंट बेहद असामान्य है। स्टैंडर्ड रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के विपरीत, जो वॉल्यूम पर निर्भर करता है, लुटियंस मार्केट अत्यधिक इल्लिक्‍विडिटी (कम खरीद-बिक्री) से परिभाषित होता है। ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बहुत कम है, अक्सर साल में केवल कुछ ही डील हो पाती हैं। इतना ज़्यादा किराया इन सख़्त सप्लाई की कमी और हेरिटेज कंजर्वेशन नॉर्म्स का सीधा नतीजा है, जो प्रॉपर्टी में बड़े स्ट्रक्चरल बदलावों या बड़े पैमाने पर नई कंस्ट्रक्शन को रोकते हैं।

आगे क्या?

जब तक प्रॉपर्टी ट्रांसफर के रेगुलेटरी रास्ते साफ नहीं हो जाते, तब तक कीमतों में सुधार की उम्मीद कम है। इस सेक्टर पर नज़र रखने वालों के लिए, L&DO का लीजहोल्ड कन्वर्ज़न पर पॉलिसी स्टैंड सबसे बड़ा मॉनिटर करने वाला फैक्टर रहेगा, क्योंकि अगर इन नियमों में ढील दी गई तो यह इस जमे हुए मार्केट में नई इन्वेंट्री को खोलने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.