2026 की पहली छमाही में भारत के ऑफिस लीजिंग मार्केट ने **48 मिलियन वर्ग फुट** का आंकड़ा छुआ। इसमें **59%** हिस्सेदारी बड़े कैंपसों की रही। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और मल्टीनेशनल कंपनियों की भारी मांग के चलते बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली NCR जैसे शहरों में हाई-क्वालिटी ग्रेड A स्पेस की मांग बढ़ी है।
Detailed Coverage
बड़े लीज सौदों ने दिखाई दम
2026 की पहली छमाही के दौरान, भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में काफी रौनक दिखी। इसका मुख्य कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), टेक्नोलॉजी फर्मों और मल्टीनेशनल कंपनियों की बढ़ती मांग है। ये कंपनियां अब अपने ऑपरेशंस को बेहतर बनाने के लिए बड़े, हाई-क्वालिटी ग्रेड A ऑफिस कैंपस को प्राथमिकता दे रही हैं।
पूरे देश में आठ प्रमुख शहरों को मिलाकर कुल 48.0 मिलियन वर्ग फुट की लीजिंग दर्ज की गई। इनमें से 28.2 मिलियन वर्ग फुट सिर्फ बड़े सौदों से आए, जिनका आकार 100,000 वर्ग फुट से ज्यादा था। यह कुल लीजिंग वॉल्यूम का 59% है, जो दर्शाता है कि कंपनियां अब ऐसे इंटीग्रेटेड और भविष्य के लिए तैयार वर्कस्पेस चाहती हैं जहां वे बड़ी संख्या में अपने कर्मचारियों को एक ही छत के नीचे रख सकें।
प्रमुख शहर और ग्रोथ का हाल
बेंगलुरु ऑफिस स्पेस के मामले में पहले नंबर पर रहा, जहां पहली छमाही में 10.1 मिलियन वर्ग फुट की बड़े फॉर्मेट लीज हुई। हालांकि, यह पिछले कुछ समय की तुलना में थोड़ी कम है, फिर भी यह शहर की कुल लीजिंग एक्टिविटी का 72% रहा।
हैदराबाद एक उभरता हुआ हाई-ग्रोथ मार्केट बनकर सामने आया है। यहां बड़े पैमाने पर लीजिंग वॉल्यूम 4.9 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया, जो 2025 की समान अवधि की तुलना में 63% की वृद्धि है। इस तेजी के कारण हैदराबाद की कुल मार्केट में बड़े लीज की हिस्सेदारी 65% हो गई।
नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) ने भी हैदराबाद जैसी ही रफ्तार पकड़ी, जहां बड़े सौदों का आंकड़ा 4.9 मिलियन वर्ग फुट रहा और यह कुल लीजिंग का 68% रहा। इसके अलावा, पुणे में 3.8 मिलियन वर्ग फुट और मुंबई में 3.1 मिलियन वर्ग फुट की बड़े लीज दर्ज की गईं। बड़े सौदों के अलावा, 50,000 से 100,000 वर्ग फुट के बीच के मिड-साइज़ सेगमेंट ने भी 9.0 मिलियन वर्ग फुट का योगदान दिया।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
प्रीमियम, बड़े-फॉर्मेट वाले ऑफिस स्पेस की यह मजबूत मांग लिस्टेड कमर्शियल रियल एस्टेट कंपनियों और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) के लिए अच्छी खबर है, जिनके पास ग्रेड A एसेट्स का बड़ा पोर्टफोलियो है। इन प्रमुख बिजनेस हब में हाई-ऑक्यूपेंसी वाले कैंपस वाली कंपनियां वैश्विक फर्मों की लगातार मांग से लाभान्वित हो सकती हैं।
हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इस सेक्टर का प्रदर्शन वैश्विक आर्थिक स्थितियों, खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों और GCCs की हायरिंग और विस्तार योजनाओं पर निर्भर करता है। डेवलपर्स के लिए रेंटल इनकम में भविष्य की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वे प्रतिस्पर्धी बाजार में हाई ऑक्यूपेंसी रेट बनाए रखने और ऑपरेटिंग कॉस्ट को मैनेज करने में कितने सफल होते हैं। निवेशक बड़े ऑफिस डेवलपर्स और लिस्टेड REITs के तिमाही नतीजों पर नजर रख सकते हैं ताकि यह पता चल सके कि लीजिंग की यह तेजी बेहतर रेंटल यील्ड और स्थिर कैश फ्लो में बदल रही है या नहीं।
