Q3 2026 में Kolkata में केवल **4,650** नई आवासीय इकाइयां लॉन्च हुई हैं, जो देश के टॉप 7 शहरों में सबसे कम है। मार्केट का फोकस मिड-सेगमेंट पर है, जिससे अनसोल्ड इन्वेंट्री **30,400** यूनिट्स के दायरे में बनी हुई है।
Kolkata का रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट इस साल की तीसरी तिमाही में आक्रामक विकास के बजाय स्थिरता को प्राथमिकता देता नजर आया। डेटा के मुताबिक, शहर में केवल 4,650 नई रेजिडेंशियल यूनिट्स लॉन्च की गईं, जो भारत के टॉप 7 प्रॉपर्टी मार्केट्स में सबसे कम है। यह अनुशासन बताता है कि स्थानीय डेवलपर्स अटकलों (speculation) के बजाय वास्तविक खरीदारों की मांग को देखते हुए निर्माण कर रहे हैं।
लक्जरी से दूरी
Mumbai और Hyderabad जैसे शहरों के विपरीत, जहाँ प्रीमियम और लक्जरी प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आई हुई है, Kolkata अभी भी अफोर्डेबल और मिड-सेगमेंट में मजबूती से टिका है। Q3 2026 में लॉन्च हुई कुल यूनिट्स में से केवल 4% ही ₹1.5 करोड़ से ऊपर की श्रेणी में थीं। शहर की औसत रेजिडेंशियल कीमत ₹5,961 प्रति स्क्वायर फीट के आसपास रही, जो साल-दर-साल 4.2% की स्थिर बढ़त दर्शाती है।
इन्वेंट्री और सेल्स डायनामिक्स
आपूर्ति को कम रखकर डेवलपर्स ने बड़े पैमाने पर अनसोल्ड इन्वेंट्री के बोझ को टाल दिया है। फिलहाल शहर में लगभग 30,400 यूनिट्स अनसोल्ड हैं। हालांकि हाउसिंग सेल्स में 4% की वार्षिक गिरावट देखी गई और यह 3,980 यूनिट्स पर आ गई, लेकिन मार्केट को आधारभूत रूप से स्टेबल माना जा रहा है। निवेशकों के लिए इसका मतलब यह है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव कम है, लेकिन साथ ही तेजी से कैपिटल एप्रिसिएशन की उम्मीद भी कम है।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
स्थिरता के बावजूद, इंडस्ट्री के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। CREDAI जैसे निकायों ने इस ओर इशारा किया है कि 'अफोर्डेबल हाउसिंग' के लिए ₹45 लाख की मौजूदा कीमत सीमा को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। अगर सरकार इस सीमा को नहीं बढ़ाती है, तो आने वाले समय में नई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, पुरानी भूमि सुधार कानून भी बड़े प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने में बाधा बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि डेवलपर्स बिना कीमतों को बढ़ाए अपने मार्जिन को कैसे बनाए रखते हैं और सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग नीति में क्या बदलाव लाती है।
