महत्वाकांक्षी ग्रोथ का रोडमैप: ₹10,000 करोड़ प्री-सेल्स का लक्ष्य
Keystone Realtors ने फाइनेंशियल ईयर 2029-30 तक ₹10,000 करोड़ की प्री-सेल्स हासिल करने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर आधारित है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, कंपनी की प्री-सेल्स बुकिंग ₹4,022 करोड़ रही, जो पिछले साल के मुकाबले 33% ज्यादा थी। कंपनी का मोमेंटम फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भी जारी रहा, जहाँ जनवरी-मार्च तिमाही में ₹1,346 करोड़ की प्री-सेल्स दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि से 58% की छलांग है।
प्रोजेक्ट पाइपलाइन में बड़ा इजाफा
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में अपने प्रोजेक्ट पाइपलाइन को भी काफी बढ़ाया है। उन्होंने ₹10,420 करोड़ के कुल डेवलपमेंट वैल्यू वाले पांच नए प्रोजेक्ट जोड़े हैं। यह संख्या उनके अनुमान से 174% ज्यादा है और प्रोजेक्ट एडिशन में पिछले साल के मुकाबले 118% की ग्रोथ दिखाती है। इस दौरान सात नए प्रोजेक्ट लॉन्च किए गए, जिनकी अनुमानित कुल डेवलपमेंट वैल्यू ₹9,813 करोड़ थी, जो फाइनेंशियल ईयर के गाइडेंस से 140% अधिक है।
FY26 के वित्तीय नतीजे
फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी ने ₹2,635 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस दर्ज किया। इसी दौरान, EBITDA ₹204 करोड़ रहा और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹95 करोड़ रहा। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कलेक्शन 13% बढ़कर ₹2,622 करोड़ हो गया, जिससे ऑपरेटिंग कैश फ्लो ₹715 करोड़ रहा।
नए शहरों में विस्तार और वित्तीय मजबूती
Keystone Realtors अपनी रणनीति के तहत मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के बाहर भी अपने ऑपरेशंस को फैला रही है। कंपनी पुणे, नागपुर और नासिक जैसे प्रमुख टियर-II शहरों में विस्तार की सक्रिय रूप से योजना बना रही है। यह कदम नए डिमांड सेंटर्स का फायदा उठाने और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए है।
वित्तीय मोर्चे पर, कंपनी ने अपनी मजबूती बनाए रखी है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक, कंपनी पर लगभग ₹755 करोड़ का ग्रॉस डेट था। इसका मतलब है कि ग्रॉस डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.26:1 है, जिसे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए काफी प्रूडेंट माना जाता है।
जोखिम और एनालिस्ट की राय
हालांकि, Keystone Realtors की ग्रोथ प्लानिंग अच्छी दिख रही है, लेकिन नए बाजारों जैसे पुणे और नागपुर में इसे लागू करने में बड़े जोखिम भी हैं। ₹10,000 करोड़ का महत्वाकांक्षी प्री-सेल्स लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रोजेक्ट लॉन्च और बिक्री की मात्रा में लगातार आक्रामक ग्रोथ की जरूरत होगी, जो मैनेजमेंट की क्षमता और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दबाव डाल सकता है।
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए, अगर नए क्षेत्रों में तेजी से विस्तार और संभावित मार्केट स्लोडाउन या प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह से ध्यान में नहीं रखा गया तो यह काफी ज्यादा हो सकते हैं।
