कर्नाटक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (K-RERA) ने एक बिल्डर को खरीदारों को **₹10 लाख** का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला प्रॉमिस की गई सुविधाएं (amenities) न देने से जुड़ा है, जो यह साबित करता है कि बिल्डर अपने मार्केटिंग वादों से पीछे नहीं हट सकते।
क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (K-RERA) ने 4 होमबॉयर्स के पक्ष में यह बड़ा फैसला सुनाया है। मामला बेंगलुरु के जला होबली प्रोजेक्ट का है। घर खरीदारों ने लगभग ₹2.08 करोड़ प्रति फ्लैट की भारी कीमत चुकाई थी, लेकिन 2022 में सेल डीड होने के बावजूद उन्हें वे सुविधाएं नहीं मिलीं जिनका वादा किया गया था।
खरीदारों को सीनियर सिटीजन पार्क, ओपन जिम, स्पा, एम्फीथिएटर और स्पोर्ट्स कोर्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया था।
मार्केटिंग वादों की कानूनी अहमियत
रेगुलेटर ने रेरा (RERA) एक्ट की धारा 12 का हवाला देते हुए साफ कर दिया है कि विज्ञापन, ब्रोशर और प्रोस्पेक्टस में किए गए हर वादे के लिए बिल्डर कानूनी रूप से जिम्मेदार है। यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि बिल्डर अपनी मर्जी से तैयार किए गए एग्रीमेंट की आड़ लेकर खरीदारों को ठग नहीं सकते। अब कोर्ट सेल एग्रीमेंट से ऊपर उन वादों को प्राथमिकता देगा जो बुकिंग के समय किए गए थे।
जॉइंट इंस्पेक्शन में हुआ खुलासा
14 मई, 2026 को हुई जॉइंट इंस्पेक्शन में इन दावों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में न केवल मनोरंजन की सुविधाओं का अभाव पाया गया, बल्कि कंपाउंड वॉल और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) जैसे महत्वपूर्ण ढांचे भी अधूरे थे।
बिल्डर को मुआवजे की राशि चुकाने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो कंपनी पर अतिरिक्त ब्याज का बोझ भी बढ़ सकता है। यह फैसला उन रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए चेतावनी है जो प्रोजेक्ट डिलीवरी में कोताही बरत रहे हैं।
