एयरपोर्ट बना प्रॉपर्टी का इंजन, Yamuna Expressway पर बंपर उछाल!
नोएडा के जेवर (Jewar) में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) से यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) इलाके की प्रॉपर्टीज़ को ज़बरदस्त बूस्ट मिलने वाला है। मार्केट एनालिस्ट स्क्वायर यार्ड्स (Square Yards) का अनुमान है कि 2027 तक यहाँ प्लॉट की वैल्यू 28% और अपार्टमेंट के दाम 22% तक बढ़ सकते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि 2020 से 2025 के बीच ही यहाँ अपार्टमेंट की कीमतें करीब 3 गुना और लैंड वैल्यू 1.5 गुना का शानदार उछाल देख चुकी हैं। एयरपोर्ट का मुख्य उद्देश्य यहाँ एक 'एयरोट्रोपोलिस' (aerotropolis) विकसित करना है, जो एयर कनेक्टिविटी को बिज़नेस, इंडस्ट्री और रेजिडेंशियल हब से जोड़ेगा।
ग्लोबल ट्रेंड और भारत का अनुभव
एयरपोर्ट के आसपास प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज़ी आना कोई नई बात नहीं है, यह एक ग्लोबल ट्रेंड है और भारत में भी इसका असर दिख रहा है। भारत में नवी मुंबई (Navi Mumbai) और नोएडा (Noida) जैसे शहरों के एयरपोर्ट्स के नज़दीक, FY21 से FY25 के बीच प्रॉपर्टी की कीमतें लगभग 100% बढ़ीं, जो हैदराबाद (Hyderabad) और बेंगलुरु (Bengaluru) जैसे शहरों के 48% की बढ़ोतरी से काफी ज़्यादा है। यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का अपना रिकॉर्ड भी शानदार रहा है, जहाँ 2020 से 2025 के बीच प्लॉट की कीमतों में 536% और अपार्टमेंट्स में 158% का उछाल दर्ज किया गया। मौजूदा एक्सप्रेसवे और आने वाली मेट्रो लाइनें भी इस एरिया के ग्रोथ पोटेंशियल को और बढ़ा रही हैं।
ग्रोथ पर मंडराते खतरे!
हालांकि, यमुना एक्सप्रेसवे प्रॉपर्टी मार्केट की यह तेज़ रफ़्तार ग्रोथ कुछ बड़े जोखिमों से घिरी हुई है। ऐतिहासिक रूप से, इस इलाके को ज़मीन विवादों, टाइटल की अस्पष्टता और प्रोजेक्ट्स में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। साथ ही, ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) जैसे विकसित इलाकों से मुकाबला भी एक चुनौती रहा है। भले ही एयरपोर्ट के आने से माहौल बदला है, लेकिन सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट की रफ़्तार और मौजूदा ऊंचे दामों को देखते हुए सट्टेबाजी से कीमतों में अचानक उछाल का खतरा बना हुआ है। भारत की ओवरऑल इकोनॉमिक आउटलुक भी एक सवाल खड़ा करती है। FY27 तक जीडीपी ग्रोथ 6-7% रहने का अनुमान है, लेकिन लक्ज़री हाउसिंग सेगमेंट में नरमी की आशंका है, जहां 56% हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) मार्केट के धीमा होने की बात कर रहे हैं। रेज़िडेंशियल सेल्स की ग्रोथ भी FY27 में घटकर 5-7% रह सकती है, जबकि पिछले सालों में यह काफी मज़बूत थी। यह भी ध्यान रखना होगा कि भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अक्सर ज़मीन अधिग्रहण, परमिट और यूटिलिटी वर्क जैसी समस्याओं के कारण देरी और लागत में बढ़ोतरी आम है।
आगे का रास्ता और सलाह
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जल्द शुरू होने के साथ, यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर रियल एस्टेट के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ एरिया बना रहेगा। लेकिन, यह ज़रूरी नहीं कि भविष्य में कीमतों में उतनी ही तेज़ी देखी जाए जितनी पिछले पांच सालों में दिखी है। 2027 तक ब्याज दरें करीब 5.50% के आसपास रहने की उम्मीद है और महंगाई भी कंट्रोल में रहने की संभावना है। मौजूदा प्रॉपर्टी की कीमतों को बनाए रखने के लिए लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सप्लाई-डिमांड के बीच सही संतुलन बनाए रखना ज़रूरी होगा। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस इलाके में लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट की अच्छी संभावनाएं हैं, पर मार्केट के उतार-चढ़ाव और प्रोजेक्ट्स की विश्वसनीयता व इंफ्रास्ट्रक्चर की बारीकी से जांच-पड़ताल के लिए सावधानी बरतना समझदारी होगी। यह इलाका अब केवल घर खरीदने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा इन्वेस्टमेंट हब बनता जा रहा है, लेकिन इसकी स्थायी सफलता एग्जीक्यूशन की बाधाओं को दूर करने और मज़बूत कम्युनिटी व जॉब सेंटर्स के निर्माण पर निर्भर करेगी।