NCLT द्वारा गठित कमेटी ने Jaypee Infratech प्रोजेक्ट में बड़ी खामियां पकड़ी हैं। Suraksha Group के दावों के बावजूद काम की धीमी रफ्तार और फंड की कमी पर सवाल खड़े हुए हैं, जिससे **2028** तक प्रोजेक्ट पूरा होने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
Jaypee Infratech Limited (JIL) के रेजोल्यूशन प्रोसेस में एक बड़ा अड़ंगा आ गया है। 20 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट में NCLT द्वारा नियुक्त कमेटी ने कंपनी के दावों और हकीकत के बीच भारी अंतर पाया है। Suraksha Group, जिसने जून 2024 में इस कंपनी का कंट्रोल लिया था, अब नोएडा के 'विश टाउन' प्रोजेक्ट को पूरा करने के भारी दबाव में है।
काम की रफ्तार पर सवाल
Suraksha Group का दावा है कि 159 में से 84 टावर पूरे हो चुके हैं और 42 के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी मिल चुके हैं। हालांकि, कमेटी ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा है कि साइट पर मजदूरों की संख्या बहुत कम है, जिसकी वजह से कंस्ट्रक्शन की गति बेहद धीमी है। साथ ही, इस्तेमाल हो रहे मटेरियल की क्वालिटी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं पाई गई है।
वित्तीय जोखिम (Financial Risks)
कंपनी ने अगस्त 2028 तक काम पूरा करने के लिए ₹3,000 करोड़ के निवेश का वादा किया है, लेकिन कमेटी को फंड की उपलब्धता पर शक है। जेपी इंफ्रा की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी मुख्य रूप से यमुना एक्सप्रेसवे से मिलने वाले ₹500 करोड़ सालाना टोल रेवेन्यू पर निर्भर है। अगर यह कैश फ्लो कम होता है या वादा किया गया कैपिटल समय पर नहीं आता है, तो पूरा प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
NCLT अब इस पूरे मामले की निगरानी बढ़ा रहा है। आगामी सुनवाइयों में ट्रिब्यूनल कमेटी की फाइंडिंग्स को गंभीरता से लेते हुए सख्त रिपोर्टिंग के निर्देश दे सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए लेबर की संख्या और फंड के रिलीज होने जैसे फैक्टर्स पर नजर रखना बहुत जरूरी हो गया है।
