Jaipur Real Estate: कमर्शियल स्पेस में 6.6 मिलियन स्क्वायर फीट का इजाफा, क्या निवेश करना है सही फैसला?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Jaipur Real Estate: कमर्शियल स्पेस में 6.6 मिलियन स्क्वायर फीट का इजाफा, क्या निवेश करना है सही फैसला?

Jaipur का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार विस्तार की राह पर है। साल 2028 तक यहां **6.62 मिलियन स्क्वायर फीट** का नया स्पेस आने वाला है, लेकिन डबल-डिजिट में चल रही वैकेंसी रेट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

विस्तार की बड़ी योजनाएं

Jaipur खुद को एक बड़े कमर्शियल हब के रूप में तैयार कर रहा है। आने वाले सालों में 6.62 मिलियन स्क्वायर फीट का स्पेस मार्केट में जुड़ेगा, जिसमें 3.32 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस, 2.4 मिलियन स्क्वायर फीट वेयरहाउसिंग और 9 लाख स्क्वायर फीट में मॉल्स का निर्माण शामिल है। यह कदम टियर-2 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग और कॉस्ट कटिंग के ट्रेंड को दर्शाता है।

मौजूदा स्थिति और आंकड़े

वर्तमान में जयपुर का ऑफिस स्टॉक 9.7 मिलियन स्क्वायर फीट है, जहां रेंटल ₹95 प्रति स्क्वायर फीट तक पहुंच गया है। Mahindra SEZ में Wipro और Infosys जैसी कंपनियों की मौजूदगी शहर की साख को मजबूत करती है। हालांकि, रिटेल सेक्टर में 12 ऑपरेशनल मॉल्स के साथ 4.9 मिलियन स्क्वायर फीट स्पेस पहले से ही मौजूद है, और प्राइम रिटेल रेंटल ₹280 प्रति स्क्वायर फीट के आसपास है।

निवेशकों के लिए जोखिम (Risk Factors)

सबसे बड़ा खतरा डिमांड और सप्लाई के बीच का असंतुलन है। फिलहाल ऑफिस स्पेस में 24%, वेयरहाउसिंग में 22% और रिटेल सेक्टर में 16% की वैकेंसी रेट चिंता पैदा कर रही है। यदि नए प्रोजेक्ट्स के साथ मांग नहीं बढ़ी, तो डेवलपर्स के मार्जिन और रेंटल दरों पर गहरा दबाव देखने को मिल सकता है।

भविष्य की रणनीति

लॉजिस्टिक्स के लिहाज से NH-11 और NH-48 कॉरिडोर पर फोकस बढ़ रहा है। निवेशकों को आने वाले समय में रेंटल ट्रेंड और ऑक्यूपेंसी लेवल्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। सफलता इसी बात पर टिकी है कि शहर कितनी तेजी से इन नए प्रोजेक्ट्स को 'एब्सॉर्ब' (Absorb) कर पाता है, वरना ओवरसप्लाई की स्थिति बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.