Senior Living Sector: भारत में बुजुर्गों के लिए घर का कारोबार चमका, **₹13,000 करोड़** का भारी निवेश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Senior Living Sector: भारत में बुजुर्गों के लिए घर का कारोबार चमका, **₹13,000 करोड़** का भारी निवेश

भारत का सीनियर लिविंग रियल एस्टेट मार्केट तेजी से उभर रहा है, जिसमें बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे मुख्य केंद्र बने हुए हैं। अनुमान है कि यह सेक्टर **2031** तक **$11.43 बिलियन** का हो जाएगा, क्योंकि हेल्थकेयर-युक्त घरों की डिमांड और सप्लाई में भारी अंतर है।

बाजार में एक बड़ा बदलाव

भारत का रेजिडेंशियल रियल एस्टेट अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सीनियर लिविंग का सेगमेंट अब एक 'निश' (niche) कॉन्सेप्ट से निकलकर एक ठोस 'इंस्टीट्यूशनल एसेट क्लास' के रूप में सामने आ रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे ने अपनी मजबूत हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर इस सेक्टर में अपनी पैठ जमा ली है।

क्यों आ रहा है इतना पैसा?

इस सेक्टर में निवेश की मुख्य वजह सप्लाई और डिमांड का बड़ा अंतर है। वर्तमान में ऑर्गनाइज्ड सप्लाई सिर्फ 25,000 यूनिट है, जबकि डिमांड 20 से 22 लाख यूनिट के करीब आंकी गई है। इस गैप को भरने के लिए डेवलपर्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने 2025 से अब तक ₹13,000 करोड़ से ज्यादा की प्रतिबद्धता जताई है।

छोटे शहरों की ओर रुख

मेट्रो शहरों के बाद अब विकास की अगली लहर वाराणसी, अयोध्या और मैसूर जैसे शहरों की ओर शिफ्ट हो रही है। डेवलपर्स अब ऐसी जगहों पर बड़े जमीन के टुकड़े देख रहे हैं जहाँ जीवन यापन की लागत कम है और लोग आध्यात्मिक या वेलनेस-केंद्रित माहौल पसंद करते हैं।

क्या हैं चुनौतियाँ?

निवेशकों को यह समझना होगा कि यह सेक्टर पारंपरिक रियल एस्टेट से अलग है। यह प्रोजेक्ट्स हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर के मिश्रण की तरह काम करते हैं। यहाँ सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि ऑपरेटर जेरिएट्रिक केयर (geriatric care) और डेली हाउसकीपिंग को कितनी कुशलता से संभालते हैं। मार्केट पेनिट्रेशन फिलहाल महज 1% है, जो विकास के बड़े अवसर के साथ-साथ एग्जीक्यूशन रिस्क को भी दर्शाता है। भविष्य में इस बिजनेस मॉडल की स्केलेबिलिटी ही इसकी असली परीक्षा होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.