Indian Real Estate: रेजिडेंशियल कंस्ट्रक्शन मार्केट का धमाका, वैल्यू **$430 बिलियन** के पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Real Estate: रेजिडेंशियल कंस्ट्रक्शन मार्केट का धमाका, वैल्यू **$430 बिलियन** के पार

भारत में घरों की बढ़ती मांग के चलते रेजिडेंशियल कंस्ट्रक्शन मार्केट ने **$430 बिलियन** का आंकड़ा छू लिया है, जो 2019 में केवल **$235 बिलियन** था। आज कुल रियल एस्टेट कंस्ट्रक्शन में घरों का हिस्सा **85%** तक पहुंच चुका है।

मार्केट में रेजिडेंशियल सेक्टर का दबदबा

CREDAI और Anarock की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में काम की रफ्तार बहुत तेज हुई है। जहां 2009 में रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स का हिस्सा कुल कंस्ट्रक्शन में 48% था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 85% हो गया है। अगर सभी एसेट क्लासेस को मिला दें, तो 2009 के मुकाबले कुल रियल एस्टेट कंस्ट्रक्शन वैल्यू 5 गुना बढ़कर $503 बिलियन हो गई है।

क्यों आ रही है यह तेजी?

इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह लोगों का अपना घर खरीदने का सपना है। कोविड के बाद से ही घर खरीदार अब बड़े और सुविधाओं से लैस घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि रेजिडेंशियल सेल्स वैल्यू पिछले 7 तिमाही से लगातार ₹1.3 लाख करोड़ के ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, बड़े शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार और प्रोफेशनल्स की बढ़ती संख्या भी प्रीमियम हाउसिंग की डिमांड को बूस्ट कर रही है।

भविष्य की राह और चुनौतियां

इंडस्ट्री ने 2030 तक रियल एस्टेट सेक्टर की वैल्यू $1 ट्रिलियन और 2047 तक $5.8 ट्रिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, निवेशकों को ग्लोबल इकोनॉमी के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी होगी जो लिक्विडिटी को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले समय में ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और खरीदारों द्वारा उसे कितना एक्सेप्ट किया जाता है। साथ ही, प्रीमियम हाउसिंग के साथ-साथ मिड-सेगमेंट में प्राइस स्टेबिलिटी बनाए रखना डेवलपर्स के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। अब बाजार की नजरें ब्याज दरों (Interest Rates) के रुख पर टिकी हैं, जो होम बायर्स और डेवलपर्स, दोनों की जेब पर असर डालेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.