भारत की 28 प्रमुख लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.95 लाख करोड़ की रिकॉर्ड प्री-सेल्स दर्ज की है, जो पिछले साल से **17%** ज्यादा है। Godrej Properties इस सेक्टर में सबसे आगे रही, क्योंकि लग्जरी (Luxury) घरों की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि, प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम खरीदारों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।
क्या हुआ?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की टॉप 28 लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों ने बिक्री के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इन कंपनियों ने कुल मिलाकर करीब ₹1.95 लाख करोड़ की प्री-सेल्स हासिल की हैं। यह पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) के ₹1.66 लाख करोड़ की तुलना में 17% की मजबूत बढ़ोतरी दर्शाता है। यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि मार्केट में बड़े और भरोसेमंद डेवलपर्स का दबदबा बढ़ रहा है, क्योंकि खरीदार अब समय पर डिलीवरी और अच्छी क्वालिटी वाले निर्माण पर जोर दे रहे हैं।
बिक्री के लीडर्स और प्रदर्शन
बिक्री बुकिंग के मामले में Godrej Properties ने FY26 में अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। पिछले साल ₹29,444 करोड़ की बुकिंग की तुलना में इस बार कंपनी ने ₹34,171 करोड़ दर्ज किए हैं। Prestige Estates Projects Ltd ने बड़ी छलांग लगाते हुए ₹17,023 करोड़ (FY25) से ₹30,024 करोड़ की बुकिंग के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। Lodha Developers (Macrotech) ₹20,530 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर रही, जो पिछले साल के ₹17,630 करोड़ से अधिक है। वहीं, DLF Ltd ने ₹20,143 करोड़ की बुकिंग दर्ज की, जो पिछले साल के ₹21,223 करोड़ से मामूली गिरावट है। इन टॉप पांच कंपनियों ने कुल प्री-सेल्स का लगभग 60% हिस्सा हासिल किया, जो मार्केट में कुछ बड़े खिलाड़ियों के बढ़ते प्रभुत्व को दर्शाता है।
लग्जरी डिमांड क्यों बढ़ा रही है ग्रोथ?
प्री-सेल्स में हो रही वृद्धि का एक बड़ा कारण प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की ओर ग्राहकों का भारी झुकाव है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद से खरीदार बड़ी जगह, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित (gated) समुदायों वाले घरों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। डेवलपर्स ने भी लग्जरी प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें अफोर्डेबल हाउसिंग की तुलना में ज्यादा मुनाफा होता है। इसी ट्रेंड ने वैल्यू ग्रोथ को सबसे ज्यादा बढ़ाया है, क्योंकि इन सेगमेंट में प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
अफोर्डेबिलिटी की चुनौती
लिस्टेड बड़ी कंपनियों के बिक्री के आंकड़े भले ही प्रभावशाली हों, लेकिन यह सेक्टर बढ़ती अफोर्डेबिलिटी (affordability) की समस्या से जूझ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक दशक में बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें आमदनी में बढ़ोतरी की रफ्तार से कहीं ज्यादा बढ़ी हैं। लग्जरी सेगमेंट भले ही मजबूत बना हुआ हो, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग मार्केट, खासकर कम आय वाले खरीदारों के लिए, महंगी जमीन की कीमतें, बढ़े हुए निर्माण लागत और रेगुलेटरी बाधाओं के कारण मुश्किलों का सामना कर रहा है। इस स्थिति के कारण, जहां बड़ी डेवलपर्स रिकॉर्ड बिक्री कर रही हैं, वहीं आम मध्यम वर्गीय खरीदारों के लिए घर खरीदना तेजी से मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि EMI का बोझ उनकी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा ले रहा है।
जोखिम और महत्वपूर्ण बिंदु
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रॉपर्टी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद यह मांग कितनी टिकाऊ है। लग्जरी सेगमेंट पर अत्यधिक निर्भरता कुछ डेवलपर्स को मुश्किल में डाल सकती है, खासकर अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं या खरीदारों का भरोसा डगमगाता है। इसके अलावा, जहां मार्केट कंसॉलिडेशन (consolidation) बड़े खिलाड़ियों के पक्ष में है, वहीं प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने का जोखिम बना हुआ है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि क्या डेवलपर्स आक्रामक विस्तार योजनाओं को स्थिर ऋण स्तरों के साथ संतुलित कर पाते हैं, खासकर जब जमीन और निर्माण की लागत लगातार बढ़ रही है।
