India Housing Market: 2025 में रियल एस्टेट दो ध्रुवों में बंटा! प्रीमियम की बहार, आम आदमी की पहुंच से बाहर

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
India Housing Market: 2025 में रियल एस्टेट दो ध्रुवों में बंटा! प्रीमियम की बहार, आम आदमी की पहुंच से बाहर
Overview

साल 2025 में भारत का रियल एस्टेट मार्केट दो अलग-अलग रास्तों पर चलता दिखा। एक तरफ **₹1 करोड़** से ऊपर के प्रीमियम घरों की डिमांड **14%** बढ़ी और कुल बिक्री का **50%** हिस्सा इन्हीं घरों ने लिया, वहीं दूसरी तरफ **₹50 लाख** से कम कीमत वाले सस्ते घरों की डिमांड **17%** गिर गई और नए प्रोजेक्ट्स में **28%** की भारी कमी आई।

रियल एस्टेट का दोराहा: प्रीमियम में उछाल, किफायती पर संकट

साल 2025 में भारत का रियल एस्टेट सेक्टर बिलकुल दो अलग-अलग कहानियाँ कहता नज़र आया। टॉप 8 शहरों में रेसिडेंशियल बिक्री की कुल संख्या करीब 3,48,207 यूनिट्स पर ही रही, जो पिछले साल के मुकाबले बस 1% कम थी। लेकिन, इस स्थिर आंकड़े के अंदर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। ₹1 करोड़ से ऊपर के प्रीमियम घरों की डिमांड में 14% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और अब ये कुल एनुअल बिक्री का आधा, यानी 50% हिस्सा बन गए हैं। इसके ठीक उलट, ₹50 लाख से कम कीमत वाले सस्ते घरों की डिमांड में 17% की भारी गिरावट आई और नए लॉन्च 28% तक गिर गए। ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच के मिड-रेंज सेगमेंट में भी बिक्री 8% घटी, जिससे मार्केट का ये ध्रुवीकरण और भी गहरा हो गया।

प्रीमियम की ओर क्यों मुड़ा मार्केट?

यह प्रीमियम की ओर बढ़ता रुझान भारतीय हाउसिंग मार्केट का चेहरा तेजी से बदल रहा है। 2018 की शुरुआत में जहां ₹1 करोड़ से ऊपर के घर कुल बिक्री का सिर्फ 16% थे, वहीं 2025 में ये आंकड़ा 50% तक पहुंच गया। JLL के आंकड़े बताते हैं कि 2025 की पहली छमाही में प्रीमियम घरों ने मार्केट शेयर का 62% कब्जा कर लिया, जो पिछले साल 51% था। खासकर ₹3-5 करोड़ वाले घरों में डिमांड बहुत मजबूत देखी गई।

इस तेजी की मुख्य वजहें हैं बढ़ती आमदनी, शानदार लाइफस्टाइल की चाहत और ग्लोबल उम्मीदों के साथ लौट रहे NRI (अनिवासी भारतीय)। नतीजतन, बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की एवरेज कीमत बढ़ गई। NCR इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां कीमतों में 19% की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद हैदराबाद 13% और बेंगलुरु 12% के साथ रहे। RBI की तरफ से ब्याज दरों में कटौती और स्थिर महंगाई जैसे मैक्रो इकोनॉमिक सपोर्ट ने मार्केट को सहारा दिया, लेकिन इसका फायदा बड़े पैमाने पर प्रीमियम सेगमेंट को ही मिला।

affordability संकट और सेक्टर पर दबाव

रियल एस्टेट मार्केट का यह प्रीमियम की ओर आक्रामक झुकाव एक गंभीर affordability संकट पैदा कर रहा है। डेवलपर्स कम मार्जिन वाले प्रोजेक्ट्स से हट रहे हैं, जिसके चलते सस्ते सेगमेंट में नए लॉन्च 28% गिर गए हैं। इस रणनीतिक बदलाव से ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों में सप्लाई की भारी कमी आ गई है, जबकि डिमांड 17% सिकुड़ गई। 2022 में जहां ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों का मार्केट शेयर करीब 63% था, वह 2025 में घटकर सिर्फ 21% रह गया है। इसकी वजह से शहरी इलाकों में मध्यम वर्ग का बड़ा तबका घर खरीदने से बाहर हो गया है।

वहीं, मार्केट के मोर्चे पर, Nifty Realty इंडेक्स 2025 में सबसे खराब परफॉर्म करने वाले सेक्टर्स में से एक रहा। यह अपने पीक से 26% से ज्यादा गिर गया और बेयर मार्केट टेरिटरी में पहुंच गया। बड़े डेवलपर्स के शेयर की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है, जो प्रीमियम सेगमेंट की ग्रोथ के बावजूद सेक्टर पर छाए दबाव को दर्शाती है। RERA का लागू होना राज्यों में अभी भी एकसमान नहीं है, और एनफोर्समेंट व देरी को लेकर शिकायतें जारी हैं, जिससे कई खरीदार अटके हुए प्रोजेक्ट्स में फंसे हुए हैं।

आगे का रास्ता

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि बढ़ती दौलत और लाइफस्टाइल की चाहत के कारण प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में डिमांड मजबूत बनी रहेगी। डेवलपर्स का फोकस हाई-मार्जिन प्रोजेक्ट्स पर ही रहने की उम्मीद है, जिससे प्रीमियम कैटेगरी में सप्लाई कम रह सकती है और कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। हालांकि, कुल बिक्री में मामूली ग्रोथ या स्थिरता दिख सकती है, लेकिन प्रीमियम की ओर झुकाव जारी रहने की संभावना है। लेकिन, हाई-एंड एस्पिरेशन और आम आदमी की affordability के बीच बढ़ती खाई एक गंभीर चिंता का विषय बनी रहेगी, जो लंबे समय में सेक्टर की सोशल इक्विटी और सस्टेनेबल ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.