हरित ऊर्जा का कमाल: भारत में ₹12 लाख करोड़ की जमीन का नया बाज़ार तैयार!

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AuthorAditya Rao|Published at:
हरित ऊर्जा का कमाल: भारत में ₹12 लाख करोड़ की जमीन का नया बाज़ार तैयार!
Overview

भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे 2030 तक ज़मीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के क्षेत्र में ₹10-15 बिलियन (करीब ₹12 लाख करोड़) का बड़ा अवसर पैदा होने वाला है। नेट-जीरो लक्ष्यों और सरकारी नीतियों के ज़ोरदार समर्थन से, सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए लगभग 7 लाख एकड़ ज़मीन की ज़रूरत होगी। इस उछाल से इंडस्ट्रियल स्पेस और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाओं की मांग भी बढ़ रही है।

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हरित क्रांति से रियल एस्टेट को बूस्ट

भारत की रिन्यूएबल एनर्जी के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता से रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े बदलाव आने वाले हैं। महत्वाकांक्षी नेट-जीरो लक्ष्यों और सरकारी नीतियों के ज़ोरदार समर्थन से, देश में सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट्स का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। Colliers India का अनुमान है कि इस "ग्रीन शिफ्ट" से 2030 तक ज़मीन अधिग्रहण और एकत्रीकरण (Land Acquisition and Aggregation) के लिए $10-15 बिलियन (लगभग ₹1.25 लाख करोड़) का एक बड़ा बाज़ार तैयार हो सकता है।

ज़मीन की मांग में भारी उछाल

2030 तक 270-300 GW की सोलर और विंड ऊर्जा क्षमता जोड़ने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, लगभग 7 लाख एकड़ ज़मीन की आवश्यकता होगी। यह मांग मुख्य रूप से देश भर के प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कॉरिडोर्स और नए निवेश क्षेत्रों पर केंद्रित है। चूँकि ज़मीन की लागत आमतौर पर प्रोजेक्ट खर्चों का 10-12% होती है, इसलिए इस बढ़ी हुई मांग से कीमतों पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है।

इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग को भी फायदा

ज़मीन अधिग्रहण के अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का विस्तार इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेगमेंट को भी फायदा पहुंचा रहा है। इस क्षेत्र के लिए उपकरण बनाने वाले मैन्युफैक्चरर्स अपनी फिजिकल मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। 2021 और 2025 के बीच, इन ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) ने प्रमुख भारतीय शहरों में 6.1 मिलियन वर्ग फुट का ग्रेड ए इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग स्पेस लीज़ पर लिया। इस अवधि के दौरान इस सेगमेंट में कुल मांग में इनकी हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 8% हो गई।

इन रिन्यूएबल एनर्जी OEMs द्वारा सालाना लीज़िंग में चार गुना वृद्धि हुई है, जो 2025 में लगभग 3 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई। चेन्नई और पुणे प्रमुख मांग केंद्र बनकर उभरे हैं, जो 2021 के बाद से लीज़ पर लिए गए स्थान का दो-तिहाई हिस्सा हैं। Colliers का अनुमान है कि 2030 तक, इन OEMs से सालाना मांग 4-7 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच सकती है, जो सेक्टर की कुल स्पेस आवश्यकताओं का 10-15% होगा।

सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर के अवसर

ग्रीन एनर्जी में वृद्धि से किफायती आवास, रेंटल अकोमोडेशन, ऑफिस स्पेस, ट्रेनिंग फैसिलिटीज़ और इंडस्ट्रियल टाउनशिप की मांग भी बढ़ रही है। यह विकास विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में देखा जा रहा है जो रिन्यूएबल एनर्जी हब के रूप में उभर रहे हैं। यह व्यापक विकास भारत के हरित ऊर्जा में परिवर्तन से प्रेरित एक महत्वपूर्ण आर्थिक बढ़ावा का संकेत देता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.