भारत के 'घोस्ट मॉल्स': 74 रिटेल जायंट्स खाली पड़े, क्या इन्हें बचाया जा सकता है? नाइट फ्रैंक रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत के 'घोस्ट मॉल्स': 74 रिटेल जायंट्स खाली पड़े, क्या इन्हें बचाया जा सकता है? नाइट फ्रैंक रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा!
Overview

नाइट फ्रैंक इंडिया की एक नई रिपोर्ट ने भारत के शीर्ष 32 शहरों में 74 'घोस्ट शॉपिंग सेंटर्स' की पहचान की है, जिनकी विशेषता 40% से अधिक खालीपन और तीन साल से अधिक समय से परिचालन है। ये 365 केंद्र 15.5 मिलियन वर्ग फुट खाली जगह का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, रिपोर्ट क्षमता पर प्रकाश डालती है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि यदि 15 केंद्रों को रेट्रोफिट किया जाए तो वे सालाना ₹357 करोड़ उत्पन्न कर सकते हैं, जो खुदरा रियल एस्टेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन अवसर की ओर इशारा करता है।

नाइट फ्रैंक इंडिया की हाल ही में आई रिपोर्ट, 'थिंक इंडिया थिंक रिटेल – वैल्यू कैप्चर: अनलॉकिंग पोटेंशियल', ने भारत के रिटेल परिदृश्य में एक बढ़ती चिंता पर प्रकाश डाला है: 'घोस्ट शॉपिंग सेंटर्स' का प्रसार। ये रिटेल प्रॉपर्टीज उच्च खालीपन दरों और उपभोक्ताओं के बीच घटती प्रासंगिकता से जूझ रही हैं।

रिपोर्ट इन 'घोस्ट मॉल्स' को ऐसे परिचालन रिटेल प्रॉपर्टीज के रूप में परिभाषित करती है जो तीन साल से अधिक समय से परिचालन में हैं और जिनमें उनकी कुल पट्टे योग्य जगह (leasable space) का 40% से अधिक खाली है। सर्वेक्षण किए गए 32 प्रमुख शहरों में, 365 शॉपिंग सेंटरों में से 74 इस श्रेणी में आते हैं, जो 15.5 मिलियन वर्ग फुट के खाली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

घोस्ट मॉल्स: एक बढ़ती चिंता

  • ये केंद्र उच्च खालीपन, कमजोर किरायेदार चयन (tenant curation), पुरानी अवसंरचना और उपभोक्ताओं के बीच प्रासंगिकता में सामान्य गिरावट से चिह्नित हैं।
  • निष्कर्ष बताते हैं कि भारत के लगभग पांचवें परिचालन शॉपिंग सेंटर अब 'घोस्ट एसेट्स' बन गए हैं, जो क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य के लिए एक चुनौती है।

मुख्य आंकड़े और डेटा


  • सर्वेक्षण किए गए कुल शॉपिंग सेंटर: 32 शहरों में 365।

  • पहचाने गए 'घोस्ट मॉल्स': 74।

  • घोस्ट मॉल्स में कुल खाली क्षेत्र: 15.5 मिलियन वर्ग फुट।

  • रेट्रोफिटिंग के लिए पहचाने गए केंद्र: 15।

  • रेट्रोफिट किए गए केंद्रों से संभावित वार्षिक किराये की आय: ₹357 करोड़।

पुनरुद्धार का मार्ग


  • रिपोर्ट इन अल्प-प्रदर्शन वाली संपत्तियों (underperforming assets) में एक महत्वपूर्ण अवसर पर प्रकाश डालती है।

  • 15 केंद्र, जो सामूहिक रूप से 4.8 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र को कवर करते हैं, रेट्रोफिटिंग के लिए उम्मीदवार के रूप में पहचाने गए हैं।

  • सफल रेट्रोफिटिंग न केवल इन स्थानों को पुनर्जीवित कर सकती है, बल्कि अनुमानित ₹357 करोड़ की वार्षिक किराये की आय भी उत्पन्न कर सकती है।

  • पुरानी रिटेल प्रॉपर्टीज की छिपी हुई क्षमता को अनलॉक करने के तरीके के रूप में 'एडैप्टिव रियूज' (adaptive reuse) रणनीतियों को भी प्रस्तुत किया गया है।

बाजार का दृष्टिकोण


  • नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, शिशािर बाइजल, ने उल्लेख किया कि भारत का रिटेल क्षेत्र मजबूत खपत (consumption) द्वारा समर्थित विकास के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है।

  • उच्च-गुणवत्ता, संगठित रिटेल प्रारूपों (organized retail formats) की ओर एक स्पष्ट बदलाव है, जिसका प्रमाण ग्रेड ए मॉल्स में केवल 5.7% खालीपन दर से मिलता है।

  • कई टियर 2 शहर भी मजबूत 'एब्जॉर्प्शन ट्रेंड्स' (absorption trends) प्रदर्शित कर रहे हैं, जो क्षेत्र-व्यापी लचीलापन और विस्तार की क्षमता को दर्शाता है।

  • बाइजल ने इस बात पर जोर दिया कि पुनर्विकास (redevelopment) या 'एडैप्टिव रियूज' के माध्यम से पुराने केंद्रों को पुनर्जीवित करना भारत के रिटेल परिवर्तन के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उपभोक्ताओं की मांगें विकसित हो रही हैं और ब्रांड अपनी उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं।

प्रभाव


  • रियल एस्टेट डेवलपर्स: अल्प-प्रदर्शन वाली संपत्तियों को पुनर्विकासित या पुन: उपयोग (repurpose) करने के दबाव का सामना करते हैं, जो मूल्य निर्माण के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों प्रस्तुत करते हैं।

  • रिटेल ब्रांड्स: पुनर्जीवित केंद्रों में अवसर पा सकते हैं या नए प्रारूपों से प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकते हैं।

  • निवेशक: रिटेल रियल एस्टेट पोर्टफोलियो के स्वास्थ्य का आकलन करने और पुनर्विकास परियोजनाओं या अच्छा प्रदर्शन करने वाले मॉल्स में संभावित निवेश की पहचान करने की आवश्यकता है।

  • शहरी नियोजन: इन बड़ी जगहों के पुन: उपयोग से शहर के बुनियादी ढांचे और स्थानीय आर्थिक विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रभाव रेटिंग: 6/10

कठिन शब्दों की व्याख्या

  • घोस्ट शॉपिंग सेंटर्स (Ghost shopping centres): तीन साल से अधिक समय से 40% से अधिक खालीपन वाले परिचालन शॉपिंग सेंटर।
  • खालीपन दर (Vacancy rate): एक संपत्ति में खाली स्थान का प्रतिशत।
  • पट्टे योग्य स्थान (Leasable space): एक संपत्ति के भीतर कुल क्षेत्रफल जो किराए या पट्टे के लिए उपलब्ध है।
  • रेट्रोफिटिंग (Retrofitting): पुरानी इमारतों के प्रदर्शन, सुरक्षा या दक्षता में सुधार के लिए उनमें नई तकनीक या सुविधाओं को जोड़ने की प्रक्रिया।
  • एडैप्टिव रियूज (Adaptive reuse): पुरानी इमारत को ध्वस्त करने के बजाय उसे नए उपयोग के लिए पुन: उपयोग करने की प्रक्रिया।
  • किरायेदार चयन (Tenant curation): रिटेल प्रॉपर्टी में वांछनीय किरायेदार मिश्रण बनाने के लिए व्यवसायों और ब्रांडों का रणनीतिक चयन।
  • एब्जॉर्प्शन ट्रेंड्स (Absorption trends): एक विशिष्ट बाजार में, एक विशिष्ट अवधि में वाणिज्यिक रियल एस्टेट स्थान कितनी जल्दी पट्टे पर लिया या बेचा जाता है, उसकी दर।
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